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Meri udaan mera aasman

हार नही है जीत नही है जीवन तो बस एक संघर्ष है ……..

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मेरा अपना है तू तो लौट आएगा …….

पोस्टेड ओन: 22 Oct, 2013 कविता में

न जाने कोई किसी से क्यों खफा होता है
क्या बेवफाई का नाम ही वफ़ा होता है


गम ही देना है तो जानलेवा दे
यूँ रोज रुलाने से क्या होता है



मेरा अपना है तू तो लौट आएगा
दिल को समझाने से क्या होता है


मैं रोऊँ तो आँख तेरी भी भर आये

दोस्ती में आजकल ऐसा कहाँ होता है



तमन्ना खाक में मिलने की रखते हैं हम

बिना रब की मर्जी के ये भी कहाँ होता है



सही कहते हो कि लिखना बंद कर दूँ अब

कविताये लिखने से भी दर्द बहुत होता है



और अंत में  …………


चाहते हैं तुमको पाना भी, और भूल जाना भी हम
बात किस्मत की है मेरे चाहने से क्या होता है

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
November 13, 2013

मैंने सारी उम्र किसी मंदिर में क़दम नहीं रक्खा लेकिन जब से तेरी दुआ में मेरा नाम शरीक हुआ है तेरे होंठो की जुम्बिश पर मेरे अन्दर की दासी के उजले तन में घंटियाँ बजती रहती हैं

    Sonam Saini के द्वारा
    November 25, 2013

    हम्म्म……….शुक्रिया यहाँ पधारने के लिए …. :)

sanjay kumar garg के द्वारा
October 26, 2013

सोनम जी, सादर नमन! सुन्दर ग़ज़ल लिखी है आपने “न जाने कोई किसी से क्यों खफा होता है क्या बेवफाई का नाम ही वफ़ा होता है” सुन्दर लाईने है, किसी शायर ने लिखा है-”कुछ तो मजबूरियां रही होगी, यूँ ही कोइ बे वफ़ा नहीं होता” पुन बधाई! सोनम जी!

    Sonam Saini के द्वारा
    October 28, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद संजय सर जी ………..आपका कीमती समय देने के लिए आभार ….

sinsera के द्वारा
October 25, 2013

खूबसूरत बात और ज़िन्दगी की सचाई भी…..उम्दा रचना..ऐसे ही अच्छा अच्छा लिखती रहो…

    Sonam Saini के द्वारा
    October 28, 2013

    शुक्रिया जी ………… :) :) :D

Ashish Mishra के द्वारा
October 25, 2013

मन को छू जाने वाली रचना, बधाई सोनम जी.

    Sonam Saini के द्वारा
    October 28, 2013

    ब्लॉग पर आपका स्वागत है आशीष जी ……..रचना को सराहने के लिए शुक्रिया

yogi sarswat के द्वारा
October 25, 2013

मेरा अपना है तू तो लौट आएगा दिल को समझाने से क्या होता है मैं रोऊँ तो आँख तेरी भी भर आये दोस्ती में आजकल ऐसा कहाँ होता है अति सुन्दर अलफ़ाज़ प्रिय सोनम !

    Sonam Saini के द्वारा
    October 28, 2013

    धन्यवाद सर जी

October 24, 2013

मैं रोऊँ तो आँख तेरी भी भर आये दोस्ती में आजकल ऐसा कहाँ होता है बहुत सही सोनम जी

    Sonam Saini के द्वारा
    October 25, 2013

    जी नमस्कार शालिनी जी ……………….आजकल ऐसा ही तो होता है ……….. दोस्ती भी बस दिखावे भर की रह गयी है जमाने में …………खैर आपने रचना को सराहा व प्रतिक्रिया दी इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया …..

jlsingh के द्वारा
October 24, 2013

बहुत अच्छी रचना!

    Sonam Saini के द्वारा
    October 25, 2013

    धन्यवाद आदरणीय जे एल सिंह सर जी ………….

ashishgonda के द्वारा
October 24, 2013

“”चाहते हैं तुमको पाना भी, और भूल जाना भी हम बात किस्मत की है मेरे चाहने से क्या होता है”" वाह वाह वाह बहुत बढ़िया… आज काफी समय बाद जागरण का पन्ना खोला फीचर्ड ब्लॉग में आपनी बहन और पसंदीदा लखिया का चेहरा देखा क्लिक किया और कविता कई बार पढ़ा हर बार बस वाह वाह वाह ही निकली सचमुच बहुत सुन्दर कविता और बहुत उन्दा…मैं जा रहा हूँ इसे लेकर फसबुक तक रोक सको तो रोक लो… मुझे तो लगता है आज बहुत दिन बाद जब जागरण खोला तो पढने का एक शानदार अनुभव रहा इतनी अच्छी कविता को जन्म देने के लिए आभार सोनम जी.

    Sonam Saini के द्वारा
    October 25, 2013

    आशीष भाई नमस्कार ……………पहली प्रतिक्रिया आपकी मिली वो भी ऐसी……….अच्छा लगा जानकर कि आपको ये रचना इतनी पसंद आयी! कविता को कई बार पढने के लिए धन्यवाद और ये क्या स्कूल क्या छोड़ा अब लिखने में गलतिया करने लगे हो ! व्याकरण सम्बंधित कई गलतिया है ! रचना को फेसबुक पर ले जाने से मैं भला आपको कैसे रोक सकती हूँ …… :) …… लेकिन सिर्फ एक बात कहूँगी कि किसी की भी रचना को सिर्फ वहां शेयर करो जहाँ उसे सम्मान मिल सके …….अपनत्व एवं सराहना भरी प्रतिक्रिया देने के लिए आपका भी आभार व धन्यवाद




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