Meri udaan mera aasman

हार नही है जीत नही है जीवन तो बस एक संघर्ष है ........

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पीड़ा का रिश्ता मात्र जीव से है ........

Posted On: 28 Nov, 2013 Others,social issues,कविता में

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जब भी कोई रामायण को देखता है या पढता है या फिर उसके बारे में सुनता है तो उन देखने, सुनने, या पढ़ने वालो में से अधिकतर लोगो के मन में जो पहला प्रश्न उठता है वो है कि भगवान श्री राम ने सीता माता के साथ ऐसे क्यों किया ?


क्यों श्री राम ने सीता मैया को जंगल में भटकने के लिए छोड़ दिया ? वो भी बिना किसी अपराध के। क्या श्री राम को सीता मैया का दर्द उनकी तकलीफ दिखाई नही दी ? रामायण के बारे में जानने के बाद अधिकतर लोगो को श्री राम पर गुस्सा भी आया होगा और उनकी नज़रो में भगवान श्री राम एक बहुत बड़े अपराधी भी होंगे ? आप लोग क्या सोचते है ये कि भगवान श्री राम ने सीता माता पर जानबूझकर अन्याय किया या ये कि रामायण में जो भी हुआ उसमे सिर्फ और सिर्फ सीता माता को ही दर्द और तकलीफ से गुजरना पड़ा ? आप सभी का क्या मत है ?

अधिकतर ऐसा होता है कि जब भी (आज कलयुग में भी) किसी स्त्री पर कहीं कोई पुरुष अत्याचार करता है तो सबसे पहला जो उदाहरण दिया जाता है वो है श्री राम का। स्त्री कहती है कि “सॉरी सॉरी” अधिकतर स्त्रियाँ ऐसा कहती हैं कि स्त्रियो पर अत्याचार तो भगवान के टाइम से ही होता आ रहा है। जब भगवान ने ही एक निर्पराध स्त्री से पहले अग्नि परीक्षा ली और फिर सिर्फ कुछ लोगो के कहने पर वनवास भेज दिया तो फिर इंसानो से क्या अपेक्षा की जा सकती है। वैसे अगर देखा जाये तो बात सही भी है लेकिन पूरी तरह से नही।


जो लोग स्त्री जाति पर या यूँ कहूं कि सीता माता पर होने वाले अन्याय के लिए श्री राम को दोषी मानते है उनके बारे में मैं सिर्फ इतना ही कहूँगी कि या तो उन लोगो ने रामायण को ठीक से पढ़ा या देखा नही (टीवी पर) या फिर वो उन लोगो में से हैं जो स्त्रियो पर होने वाले हर छोटे-बड़े अपराध या अन्याय के लिए सिर्फ और सिर्फ पुरुषो को ही दोषी मानते हैं।

रामायण में तो सब कुछ बहुत ही साफ-साफ दर्शाया गया है ! रामायण को हम एक मनुष्य होने के नाते न देखकर अगर खुद को परम पिता परमात्मा की एक रचना मानकर देखे तो रामायण में हमारे पूरे जीवन का सार मिलता है (ऐसा मेरा व्यक्तिगत मत है इससे आप सभी सहमत हो ये जरूरी नही) ! रामायण एक पूर्व रचित कथा है जिसे उसके घटित होने से पहले ही रच दिया गया था ! कब, कहाँ, किसके साथ क्या होना है सब पहले से ही निर्धारित था ! अगर किसी ने ध्यान से देखा हो तो रामायण में यह साफ तौर पर बताया गया है कि भगवान राम ने सीता माता की अग्नि परीक्षा इसलिए नही ली थी कि उन्हें उनकी पवित्रता पर संदेह था बल्कि जिसे दुनिया सीता माता की अग्नि परीक्षा समझती है वो अग्नि परीक्षा नही अग्नि देव से सीता माता को वापस लेने की एक प्रक्रिया थी जिसे हम कलयुग के तुच्छ से प्राणी एक पुरुष द्वारा स्त्री पर किये गये अत्याचार के रूप में देखते हैं ! ऐसा घटित होना पहले से ही तय था जिसे चाहकर भी कोई रोक नही सकता था, खुद ईश्वर भी नही !


श्री राम द्वारा “सिर्फ कुछ लोगो के कहने पर” सीता माता को वनवास भेजा जाना भी पहले से ही तय था जिसे न तो श्री राम रोक सकते थे न सीता मैया और न ही कोई और ! अयोध्या के जिन लोगो को सीता माता को वनवास भेजने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है वास्तव में वो उसके जिम्मेदार होते ही नही है क्योंकि रामायण के अंत में यह दर्शाया गया है कि अयोध्या के जिन जिन लोगो ने और बाकि सभी ने भी जैसे सुग्रीव, विभीषण आदि किसी न किसी देवता के ही रूप थे ! एक बार को अगर ऐसा मान भी लिया जाये कि ऐसा कुछ नही था सभी सामान्य मनुष्य ही थे न कि किसी देवता का स्वरुप तो भी श्री राम कहीं भी किसी भी रूप में सीता माता के साथ हुए अन्याय के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार नही थे ! सीता माता ने ही खुद श्री राम को लोगो के आरोपो से बचाने के लिए खुद वनवास जाने का फैसला किया था !


खैर मेरा आप लोगो को रामायण का पाठ पढ़ाने का कोई उद्देश्य नही है। मैं बस इतना ही कहना चाहती हूँ कि रामायण में जो भी हुआ उसमे सीता माता को जितनी पीड़ा सहनी पड़ी उससे कहीं ज्यादा श्री राम ने पीड़ा सही ! हाँ इतना आसान नही होता अपना सब कुछ छोड़कर वन में चले जाना जीवन भर के लिए बहुत-बहुत मुश्किल होता है सब के साथ रहते हुए अपनी पीड़ा को अपने मन में ही छुपाये रखना। सब कुछ होते हुए भी महल के अंदर ही वनवासियों की तरह जीवन यापन करना। अपने मन की पीड़ा को अनदेखा करके पूरी प्रजा के बारे में सोचना और अपने सबसे प्रिय इंसान को दुसरो की ख़ुशी के लिए खुद से दूर कर देना बहुत बहुत कठिन कार्य है जिसे सिर्फ श्री राम जैसा महान व्यक्ति ही कर सकता है। कोई जाने या न जाने, माने या न माने लेकिन श्री राम की इस पीड़ा को सीता माता अच्छे से जानती भी थी और समझतीभी थी कि उनके साथ जो भी हुआ उससे श्री राम को कितनी पीड़ा हुई है शायद उन से भी ज्यादा।


रामायण से मुझे दो बाते समझ में आती हैं पहली ये कि हम सभी इस दुनिया में एक चरित्र प्ले करने आये हैं। सभी का अपना-अपना काम है जिसे सबको करना है। जिस दिन वो काम खत्म उस दिन मृत्यु हो जाती है फिर चाहे वो किसी भी कारण से हुई हो। सब कुछ पहले से निर्धारित है। कब किसके साथ क्या होना है सब पहले से ही तय हो चुका है हमे तो बस उस तय किये हुए को अपने कर्मो से लक्ष्य तक पहुँचाना है। और दूसरी बात जो मुझे समझ में आती है वो ये कि पीड़ा का रिश्ता किसी स्त्री पुरुष से नही है यह तो हर उस जीव से जुडी है जिसने इस धरती पर जन्म लिया है फिर वो चाहे किसी भी रूप में हो।



पीड़ा का रिश्ता
मात्र जीव से है
किसी स्त्री या
पुरुष से नही
पीड़ा पर सिर्फ
मनुष्य का ही
एकाधिकार हो
ऐसा सम्भव नही
क्योंकि
पीड़ा तो हर
उस जीव को
होती है
जिसने इस
धरती पर
जन्म लिया है
फिर चाहे वो
स्वयं भगवान
ही क्यों न हो
माँ से बिछड़ता
है बच्चा तो पीड़ा
तो होती ही है
माँ को भी
बच्चे को भी
फिर चाहे वो इंसान हो
या कोई जानवर
या फिर कोई जीव जंतु
पीड़ा का रिश्ता
मात्र जीव से है
किसी स्त्री या
पुरुष से नही
और न ही
सिर्फ मनुष्य से

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72 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shubhaaruni के द्वारा
February 19, 2014

प्रिय सोनम आज आपका ब्लॉग पीड़ा का रिश्ता सिर्फ जीव से है ब्लॉग पड़ा ….उस पर हुई विभिन्न टिप्प्णियों को भी देखा .जो इस बात का सूचक है कि ………अच्छा लिखती हो …………………..

sanjay kumar garg के द्वारा
January 1, 2014

सोनम जी, सादर नमन! नए वर्ष की आपको व् आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये!

Sumit के द्वारा
December 10, 2013

बेस्ट ब्लॉगर बनाए जाने पर बधाई बहन … http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2013/12/09/आप-तो-ऐसे-न-थे…

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 9, 2013

पुनश्च :—– ” काव्यशास्त्र विनोदेन कालो गच्छति धीमताम् ! व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा !! मेरी समझ में अनर्गल प्रलापों से बचना चाहिए !!

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 9, 2013

आप की दृष्टि और सोंच बिलकुल सही है ! बेस्ट ब्लॉगर बनाए जाने पर अतिरिक्त बधाई !! पुनश्च !!

Malik Parveen के द्वारा
December 9, 2013

सोनम , बहुत ही अच्छा लिखा है यूँही ही लिखती रहो बिंदास …. जब आलोचना होने लगे तो समझ लो कि तुम भी कुछ हो ! लोग जो फालतू कि बकवास करते हैं उनपर ध्यान न देते हुए सिर्फ अपने लेखन पर ध्यान दो ! बहुत बहुत बधाइयाँ !! देखने वाले पढ़ने वाले सब समझ रहे हैं कि किसकी कैसी मानसिकता है ! तुम्हे ध्यान देने कि जरुरत नहीं … !

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
December 9, 2013

“आज खुश तो बहुत होगी तुम, अय्य्यन …!!!” लड़की या कमज़ोर होने के बहुत फायदे हैं इस देश में…!! मुझे याद आता है बचपन में मेरा छोटा भाई मुझ से लड़ाई करता था, वो जब मुझे मरता था तो मैं बर्दाश्त कर लेता था, लेकिन अगर मैं उसे हौले से भी मार देता था तो वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगता था… उसका रोना सुन माँ आ जाती थी, और फिर मुझे डांट पड़ती थी… माँ को लगता था सिर्फ मैंने उसे मारा है…गलती हम दोनों की होती थी लेकिन डांट सिर्फ मैं ही सुनता था…!! रोने-धोने और कमज़ोर होने के बहुत फायदे हैं….तुमने हौले से अनील को ‘चूँटी’ काटी थी जिसकी वजह से बेचारा इतना चिल्ल-पों मचाया और लोगों की नज़र में आ गया…लेकिन तुमने जो ‘चूँटी’ काटी थी वो किसी को नहीं दिखा…..!! लड़कियों वाली बुद्धि लगा दी…गुड है…!! ‘सदार खुश हुआ..’ … ‘तुम लड़की ही हो सो ये भी नहीं कह सकता कि ‘ये तुमने लड़कियों वाला काम किया है’

Feedback के द्वारा
December 9, 2013

आदरणीया सोनम जी, इस मंच पर व्यर्थ की टीका-टिप्पणी से किसी सम्मानित ब्लॉगर का निराश होना मंच के लिए तो चिंता जनक है ही साथ ही ऐसी लक्षित टिप्पणी मर्यादित आचरण के खिलाफ भी है। आप बिना किसी समस्या के बेबाक ब्लॉगिंग करें। हम आदरणीय अलीन जी से यह अपेक्षा करते हैं कि निंदात्मक टिप्पणी से बचें तथा अपनी बौद्धिक क्षमता का उपयोग सार्थक परिचर्चा में करें। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

yogi sarswat के द्वारा
December 9, 2013

सोचता हूँ बधाई तो देनी ही चाहिए ! हालाँकि मैं लेख पर अपने विचार पहले ही लिख चुका हूँ ! मेरे लिए , तुम्हारा लिखना और मेरा पढना दौनो एक साथ होने वाले काम हैं यानि कि मुझे लगता है सबसे पहले तुम्हारे लेख और कवितायेँ शायद मैं ही पढता हूँ ! एक बात कहूं अगर बुरा न लगे तो – तुम लेख से ज्यादा अच्छी कवितायेँ लिखती हो , उन पर ही अपना फोकस करो क्यूंकि जागरण पर बेस्ट ब्लॉगर हो जाने का मतलब ये नहीं होता कि तुम आगे से लेख ही लिखना शुरू कर दो और कविताएं लिखना छोड़ दो ! मैं तुम्हारी कविताओं से महरूम नहीं होना चाहता ! बहुत बहुत बधाई प्रिय सोनम !

Sonam Saini के द्वारा
December 8, 2013

आदरणीय जागरण संचालक मंडल सादर नमस्कार …….. मेरी आपसे विन्रम विनती है कि आप आज ही मुझे बेस्ट ब्लॉगर से हटा दे और किसी और ब्लॉगर को बेस्ट ब्लॉगर के लिए सेलेक्ट कर लें ताकि मैं आज ही अपने ब्लॉग को यहाँ से डिलीट कर सकूँ ! अगर मैं चाहती तो बिना बताये भी अभी अपने ब्लॉग को डिलीट कर सकती थी लेकिन इससे जे जे का अपमान होता और साथ ही साथ बेस्ट ब्लॉगर कि पदवी का भी ! इसलिए मेरी आपसे विन्रम विनती है कि किसी और को बेस्ट ब्लॉगर के लिए सेलेक्ट करके मुझे अपना ब्लॉग डिलीट करने कि अनुमति दें ! धन्यवाद ….

    December 8, 2013

    आप तो मुझे रुला के भगाने वाली थी. अब आप को क्या हो गया? जो एक व्यक्ति के कारण इतने लोगों से रूठ गयी……………सोनम याद है तुम्हें कभी छोटी बहन की तरह ट्रीट किया था और आज भी मेरे लिए तुम वैसी ही हो जैसे एक छोटी बच्ची. यह अलग बात है कि तुम खुद को बहुत बड़ी समझती हो यहीं कारण है तुम्हारे मन को ठेस पहुँचने का. मैं कई बार इशारे-इशारे में बताने कि कोशिश किया था कि नकारात्मकता इतनी ठीक नहीं होती.मगर यह तुम थी जिस पर यह भुत सवाल था खुद के बड़े होने की, यह तुम थी जिसे गलतफहमी थी कि मैं कुछ नहीं जानता और आप ही नहीं सारे लोग इस गलतफहमी में जीते है और जिस दिन मुझसे मुलाकात होती है. फिर भागने लगते हैं. दरअसल वो मुझसे नहीं भागते खुद से भागते है और जब खुद सबके सामने आ जाता है तो फिर वो सबसे भागने की कोशिश करते हैं. परन्तु कोई कहीं भी चला जाय पर मुझसे नहीं भाग सकता मतलब कि खुद से नहीं भाग सकता. तुम समझती हो कि तुम इस दुनिया में अकेली हो जो बाह्य रूप धारण कर राखी हो. हरेक इंसान की वही हालत है जो तुम्हारी हालत है. यहाँ तक कि खुद अनिल कुमार “अलीन” भी अछूता नहीं है इससे. परन्तु कुछ लोग ऐसे भी है जैसे संदीप झा अर्थात सूफी ध्यान मुहम्मद जैसे लोग जो खुद को स्वीकार करते हैं. अतः उन्हें भागना नहीं पड़ता क्योंकि जानते है कि खुद से भागना या छुपना एक मुर्खता के सिवा कुछ नहीं. या फिर तुम यह समझती हो अनिल कुमार “अलीन” के यहाँ रहने से तुम्हें ठेस पहुंचता है तो वह आज से और अभी से ब्लागिंग करना बंद कर रहा है . पर इस गलतफहमी में मत रहना कि मेरा काम ख़त्म हो गया क्योंकि वह अनिल कुमार ‘अलीन’ बल्कि मैं हूँ जिसे तुम स्वीकार नहीं करना चाहती मतलब वह स्वयम तुम हो. और एक बात बातों तुम तुमसे कबतक भागती रहोगी……………. ……………..अनिल कुमार “अलीन” जैसे हजारों लोग तुम्हें मिलेंगे और फिर तुम्हारा अहम् और वहम दोनों तुम्हारे सामने खड़ा हो जायेगा……………हाँ……………..हाँ…………………

    sadguruji के द्वारा
    December 8, 2013

    अनिल जी,आप यहाँ पर गलत हैं.इस मंच का अनुशासन आप तोड़ रहे हैं.किसी पर आप व्यक्तिगत हमला नहीं कर सकते.सबसे बड़ी बात ये कि हर लेखक को इस बात की पूरी आज़ादी है कि वो अपनी रूचि का लेख लिखे.आप तशाही वाली प्रवृति छोड़ें और अपने ब्लॉग पर जो आप को लिखना है लिखिए,परन्तु दूसरे के ब्लॉग पर जाकर उसे आप लिखने से मना नहीं कर सकते.आप से पूछकर कोई लेख नहीं लिखेगा.आप को लेख पसंद आया या नहीं आया,बस आप इतना ही कमेंट कर सकते हैं.व्यक्तिगत हमला आप नहीं कर सकते.अपनी ही बात मनवाने के लिए आप जिद भी नहीं कर सकते हैं.किसी का मजाक उड़ाने की इजाजत ये मंच आपको नहीं देता है.कृपया आप अपनी गलतियों को मत दोहराइए.

Mann Ki Kawita के द्वारा
December 7, 2013

पीड़ा तो हर उस जीव को होती है जिसने इस धरती पर……………बहुत ही सुंदर कविता

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    धन्यवाद ………….

Ravindra K Kapoor के द्वारा
December 7, 2013

आपका लेख राम के नाम को ह्रदय से समझने और समझाने की एक सुन्दर कोशिस है जिसके लिए आप साधुवाद की पात्र हैं. जिस राम नाम में ही जीवन का सबसे गूढ़ तथ्य छिपा है, उसके आदर्शों को आत्मसात करना तो बहुत दूर कि बात है उसे पढ़ कर समझ पाना भी शायद हर किसी के लिए सम्भव नहीं है तभी तो जीवन के प्रारम्भ से अंत तक ये शब्द अंतिम शब्द बन कर अग्नि में समर्पित होने तक साथ चलता है. सुभकामनाओं के साथ….Ravindra K Kapoor

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    कीमती समय व प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद रविन्द्र क कपूर जी ……….

dineshaastik के द्वारा
December 7, 2013

आदरणीया सोनम जी,  यदि कोई सामान्य व्यक्ति अपनी गर्भवति पत्नि को केवल एक अशिक्षित एवं अज्ञानी धोबी के कहने पर वनवास दे देता है जबकि वह चाहता तो अपनी पत्नि को उसके मायके भेज सकता था। लेकिन वह नहीं करता। हम उसे ईश्वर बनाकर उसे उसके अपराधों से  मुक्त कर देते हैं। वाह से मनुष्यों वाह….क्या यह ईश्वरीय कृत्य है।

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    नमस्कार दिनेश जी ………ईश्वर क्या है और कौन है , ये मैं आपको कभी नही समझा पाऊँगी इसलिए आपकी बात का जवाब देना भी उचित नही होगा ! लेकिन हाँ एक बात अवश्य कहना चाहूंगी कि ईश्वर को अपराध से मुक्त करने वाले हम कोई नही हैं ! ईश्वर को निचा दिखा कर उसके बारे में बुरा भला कह कर हम ईश्वर का नही खुद का ही अपमान करते हैं !…………आपने अपने विचार रखे इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद …..

dineshaastik के द्वारा
December 7, 2013

आदरणीया सोनम जी, हम इतने अंधविश्वासी क्यों हैं? बिना तर्क किये एवं विवेक का प्रयोग किये किसी भी बात सिद्दाँत पर यकीन कर लेते हैं। हम धार्मिक मामलों में बुद्धि का प्रयोग करना पाप समझने लगते हैं। ईश्वर होता नहीं है, बल्कि मनुष्य की कल्पना शक्ति द्वारा बनाया जाता है। ईश्वर मनुष्य की मानसिक रचना है।  उसके सारे गुण एवं शक्तियाँ हमारी ही दी हुई  हैं। यदि कहीं ईश्वर में अवगुण परिलक्षित होते हैं तो वह हम मनुष्यों के ही हैं।

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    ईश्वर है या नही यह सबके अपने अपने विचार हैं ! जहाँ तक मेरा मानना है ईश्वर समझने का नही महसूस करने का नाम है ! वो हर पल मुझमे हैं इतना मुझे मालूम है ! आप ईश्वर को नही मानते यह आपका अपना विचार है मैं इस बारे में कुछ नही कहूँगी …………धन्यवाद

    dineshaastik के द्वारा
    December 8, 2013

    यदि ईश्वर हम मनुष्यों में है तो फिर हमें मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि बनाने की क्या जरूरत? धर्मगुरु, पैगम्बर, मौलवी और पादरी आदि एजेन्टों की क्या जरूरत? फिर तो ये धर्म की दुकानें बंद होना चाहिये। लेकिन सब यह जानते हुये कि हममें ईश्वर है फिर भी गुरु को तलाश करते हैं। मंदिर आदि में भगवान को ढूढ़ते हैं। उसकी प्रतिमायें गढ़ते हैं। वाह रे मनुष्य…..

sinsera के द्वारा
December 6, 2013

बेस्ट ब्लॉगर की पदवी मुबातिक हो सोनम जी…..कहावत याद आ गयी…..”जहाँ जहाँ गयीं राधा रानी, वहाँ वहाँ बरसा पानी…. ” यहाँ तो हमारे आने से पहले ही पानी बरस चुका है….अप इन सब से परे , ऐसे ही लिखती रहें, इसी कामना के साथ….

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    नमस्कार जी ……….. आपकी कहावत का मतलब मुझे समझ नही आया ! शुभकामनाओ और आपने अपने कीमती समय में से थोडा सा समय हमे दिया बहुत बहुत शुक्रिया सबके लिए ….

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
December 6, 2013

माँ से बिछड़ता है बच्चा तो पीड़ा तो होती ही है माँ को भी बच्चे को भी फिर चाहे वो इंसान हो या कोई जानवर सोनम जी अच्छा लेख और रचना …जब जीवन ही न हो तो क्या संवेदना क्या पीड़ा क्या आनंद द्वेष सब वृथा ही तो है कोई अस्तित्व नहीं ….ब्लागर आफ दी वीक बनने के लिए बधाई भ्रमर ५

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    धन्यवाद सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर जी ………….

vijay के द्वारा
December 6, 2013

रामायण से मुझे दो बाते समझ में आती हैं पहली ये कि हम सभी इस दुनिया में एक चरित्र प्ले करने आये हैं। सभी का अपना-अपना काम है जिसे सबको करना है। जिस दिन वो काम खत्म उस दिन मृत्यु हो जाती है फिर चाहे वो किसी भी कारण से हुई हो। सब कुछ पहले से निर्धारित है। कब किसके साथ क्या होना है सब पहले से ही तय हो चुका है हमे तो बस उस तय किये हुए को अपने कर्मो से लक्ष्य तक पहुँचाना है। और दूसरी बात जो मुझे समझ में आती है वो ये कि पीड़ा का रिश्ता किसी स्त्री पुरुष से नही है यह तो हर उस जीव से जुडी है जिसने इस धरती पर जन्म लिया है फिर वो चाहे किसी भी रूप में हो…. मैं आप की सभी बातो से सहमत हू मगर आपके ऊपर दिए तर्क को मान ले तो सारे अपराधियों को छोड़ दिया जाना चाहिए आसाराम ,तरुण तेजपाल ,ये सब तो इस का मतलब अपना किरदार ही निभा रहे थे तो फिर तो ये सब निर्दोष है इस बारे में अपने विचार बताये

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    नमस्कार विजय जी ….सबसे पहले तो तहे दिल से आपका शुक्रिया कि आपने अपने विचार यहाँ रखे … आपके सवाल के जवाब में बस दो ही बाते कहूँगी पहली ये कि “अपना किरदार तो रावण भी निभा रहा था” क्या उसे सजा नही मिली ???? और दूसरी ये कि अपराध करना अपराधी का कर्म था और उसे सजा देना कानून का कर्म है !

    sadguruji के द्वारा
    December 8, 2013

    विजय जी,उनके किरदार में सजा भी शामिल है.जैसे रावण के किरदार में उसकी सजा भी शामिल है.

aman kumar के द्वारा
December 6, 2013

सोनम जी को बधाई …….. लिखती रहो आलोचना होना यही दर्शाता है की लोग आपको स्वीकार करने लगे है जानने लगे है ….

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    धन्यवाद अमन जी ………आलोचनाओ से डर नही लगता डर लगता है बिना बात कि बकवास से … जिसका कोई मतलब नही होता ……

jlsingh के द्वारा
December 6, 2013

‘ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक’ सम्मान हेतु बहुत बहुत बधाई!

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    धन्यवाद सर जी ……… :)

abhishek shukla के द्वारा
December 6, 2013

पीङा किसी जाति, वर्ग, या समाज कि विरासत नहीं होती, सब दुखी होते हैं जैसे पीङा की पारी बंधी हो…………अंतस को टटोलता हुआ लेख…….हार्दिक बधाई….

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    धन्यवाद अभिषेक जी …..

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
December 6, 2013

लातारणीय अनिल, आदरणीय प्रवीण जी, और प्रातः स्मरणीय सोनम जी…!! यूँ स्कूली बच्चों की तरह आपस में न लड़ें… ऊर्जा यूँ ही व्यर्थ न करें… कुछ सकारात्म कीजिए, अपनी शक्ति को देश हित में खर्च कीजिए…. आप गणमान्य जानो को यूँ चिल्ल-पों मचाते देख मन व्यथित हो जाता है…अब आप लोग बड़े हो गएँ हैं, इस तरह अशोभनीय ढंग से मत लड़िये….अब आप लोगों को बड़ों की तरह लड़ना चाहिए….एक दूसरे को विशुद्ध-विशुद्ध गाली देनी चाहिए…कोट-कचहरी तक घसीट कर ले जाने की बात करनी चाहिए… जंग-जंग की तरह होनी चाहिए…खून-खराबा से भरपूर…. आप लोगों का ये ‘टुचु’ लड़ाई देख कर मज़ा नहीं आया… लड़ाई मार-धाड़ और एक्शन से भरपूर होनी चाहिए… राम से कुछ सीखिए…क्या खूब लड़ते थे राम…औरतों का अपमान करना तो उनका रोज़ का धंधा था…पुरे मानव जाति के इतिहास में राम ऐसे पहले उल्लेखित व्यक्ति हैं जो औरतों पर हाथ उठाते थे…उसको गाली देते थे…उनके राज्य में लोग अपनी बेटी को बेचता था…

Lavanya Vilochan के द्वारा
December 6, 2013

बधाई हो सोनम जी……ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक बनने के लिए. बहुत ही अच्छा लिखा है.

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    लावण्या जी नमस्कार …………समय देने के लिए शुक्रिया …

ANAND PRAVIN के द्वारा
December 5, 2013

बधाई सोनम जी……ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक बनने हेतु

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    धन्यवाद आनंद प्रवीण जी …..

sadguruji के द्वारा
December 5, 2013

आदरणीय सोनम सैनी जी,आप को बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक बनने की बहुत बहुत.बधाई.आज सुबह मै आपका लेख पढ़कर कमेंट किया था.कोई कुछ भी कहे ये आप का बेस्ट लेख है.एक बार पुन:बधाई.

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद सद्गुरु जी …..

sadguruji के द्वारा
December 5, 2013

आदरणीया सोनम सैनी जी,आप का लेख मैंने दो बार पढ़ा,आप ने १०० प्रतिशत सही बात कही है.कोई भी समझदार और भगवान का भक्त आप की बातों को नकारेगा नहीं.आप ज्ञानियों की बातों से भ्रमित मत होइएगा और इस तरह के लेख आप लिखना जारी रखिये.मै बहुत से ब्लॉगरों के लेख पढता हूँ,परन्तु आप का लेख पहली बार पढ़ रहा हूँ.लेख की ये पंक्तियाँ मुझे बहुत अच्छी लगीं-”अपने मन की पीड़ा को अनदेखा करके पूरी प्रजा के बारे में सोचना और अपने सबसे प्रिय इंसान को दुसरो की ख़ुशी के लिए खुद से दूर कर देना बहुत बहुत कठिन कार्य है जिसे सिर्फ श्री राम जैसा महान व्यक्ति ही कर सकता है।” और आप के लेख की ये पंक्तियाँ भी १०० प्रतिशत अकाट्य सत्य हैं-”रामायण से मुझे दो बाते समझ में आती हैं पहली ये कि हम सभी इस दुनिया में एक चरित्र प्ले करने आये हैं। सभी का अपना-अपना काम है जिसे सबको करना है। जिस दिन वो काम खत्म उस दिन मृत्यु हो जाती है फिर चाहे वो किसी भी कारण से हुई हो। सब कुछ पहले से निर्धारित है। कब किसके साथ क्या होना है सब पहले से ही तय हो चुका है हमे तो बस उस तय किये हुए को अपने कर्मो से लक्ष्य तक पहुँचाना है। और दूसरी बात जो मुझे समझ में आती है वो ये कि पीड़ा का रिश्ता किसी स्त्री पुरुष से नही है यह तो हर उस जीव से जुडी है जिसने इस धरती पर जन्म लिया है फिर वो चाहे किसी भी रूप में हो।” जो लोग आप की आलोचना कर रहे हैं-वो लोग न जीव,न माया और न ही भगवान के बारे में सही जानकारी रखते हैं.जो लोग आप की आलोचना कर रहे हैं,वो ज्ञानी नहीं बल्कि जरुरत से ज्यादा चालाक लोग हैं.न तो इनका अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण है और न ही जबान पर,पता नहीं किस बात के ये लोग ज्ञानी हैं.इससे ज्यादा निकृष्ट सोच और क्या हो सकती है कि अपने को ज्ञानी साबित करने के लिए और दूसरों को नीचा दिखाने के लिए हम किसी की आलोचना करें.गुरुनानक देव जी ने ज्ञानी की सही परिभाषा दी है-”एक ने कही,दूजे ने मानी ! नानक कहें दोनों ही ज्ञानी !! इस लेख में आप ने अपनी सर्वोत्तम लेखन क्षमता और अपने ह्रदय की भक्ति भावना को बहुत ही सुंदर विवेकपूर्ण ढंग से प्रदर्शित किया है.विशुद्ध ज्ञान और भाव भक्ति दोनों ही दृष्टि से आपने १०० प्रतिशत सही बात कही है.इतने अच्छे लेख के लिए मै आप को बधाई देता हूँ और भविष्य में भी आप के ऐसे लेखों की मुझे प्रतीक्षा रहेगी.अपनी शुभकामनाओं सहित.

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    सद्गुरु जी नमस्कार ………….. आपने मेरे विचारो को सहमति दी इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया ….

December 4, 2013

क्या उजुल-फिजूल लिख रहीं है…………………….उम्र पचपन की और आदत बचपन की………………..कुछ नया लिखिए…………….कुछ सुखमय लिखिए……………….जब देखिये तब लेकर चली आती है……….दुःख-पीड़ा, रोना, दर्द, उदासी, …………………….सब का सब नकारात्मक…………………अब तो सकारात्मक हो जाइये…………….आपका नाम भी आप पर हसता होगा……………

    Sonam Saini के द्वारा
    December 4, 2013

    माफ़ कीजियेगा लेकिन मैंने आपसे सलाह तो मांगी नही है कि मुझे क्या लिखना चाहिए और क्या नही ! जब आपको कुछ समझ में नही आता तो कमेंट करना जरूरी है क्या ???? एक पहले भी मैंने आपसे कहा था और आज भी कह रही हूँ कि जब आपको .दुःख-पीड़ा, रोना, दर्द, उदासी से एलेर्जी है तो क्यों पढ़ते हो मेरी रचनाये ?? जरूरत नही है पढ़ने की और न ही कमेंट करने की ! मैं तो आपको बुलाने नही जाती की आइये मेरी पोस्ट पर कमेंट करिये ! अपनी हद में रहिये यही आपके लिए बेहतर होगा ……….

    December 5, 2013

    लगता है दुनिया में सबसे अधिक समझदार आप ही हैं. यही बात उनसे क्यों नहीं कहती जो आपकी इस रचना की तारीफ़ कर रहे हैं. जाइये उनसे कहिये कि तुम लोगों को कौन कहाँ है मेरी तारीफ़ करने के लिए. तबतो वह बहुत अच्छा लगता है. मोहतरमा अपनी तारीफ़ इतनी पसंद है तो आलोचना भी सहना सिख लीजिये. आखिरकार झूठ में जीने की आपकी आदत हो गयी है. वरना अपने आलेख और रचनाओ को किताबों में बंद करके रखिये और किसी बंद कमरे में जोर-जोर से पढ़कर अपने कान को संतावाना देते रहिये……कोई विरोध करने वाला नहीं मिलेगा? क्यों पढ़ता हूँ. यह मेरा कर्तव्य है जिसे निभा रहा हूँ. यदि किसी को फोड़ा है और कोई सच में एक डाक्टर का फ़र्ज़ निभाता है तो वह बिना पैसे का अपने मरीज़ को बैठाकर जबरदस्ती ओपरेशन करता है. भले उसकी सहमति हो या न हो…….मैं भी वही काम कर रहा हूँ……………………..और हद में रहने की बात कर रहीं हैं…………….जो इंसान हद से बाहर चला गया हो उससे बोलने की हिम्मत नहीं कर पाएंगी……………….बस बन्दर की तरह आसमान को देखती रह जायेंगी………………कुछ भी बोलने से पहले समझ लिया करिए कि क्या आप बोल रही हैं? मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं बुरा इंसान हूँ और अबतक मुझ जैसा बुरा कोई इस धरती पर नहीं हुआ होगा. पर आप तो एक अच्छी लड़की है तो फिर आप क्यों बुरा बन रहीं हैं. फिर तो आप मुझसे भी बुरी हो गयीं……………अभी जा रहा हूँ परन्तु याद रखियेगा जब भी आपकी बिमारी बढ़ेगी आपका इलाज़ करने आऊंगा………………

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 5, 2013

    मेरे हिसाब से मित्र अपनी बात को रखने का अधिकार सभी को है और उसे पढ़ने या ना पढ़ने का भी अधिकार सभी को है ………..आप किसी को रचना खराब होने पर यह तो कह सकते हो कि आपको पसंद नहीं आई…….किन्तु इतना तल्ख़ शब्दों “उलूल फिजूल” आदि यह सही नहीं इसके अलावे आप किसी पर व्य्क्तिगत हमला भी नहीं कर सकते…………यह गलत है …….तब जब कि लेखक आपको इसके लिए मना कर चूका है हाँ यदि आपकी बातों से किसी को खेद नहीं तो आप अपनी बात वहाँ रखिये ……..

    December 6, 2013

    मित्र………………………….”सही नहीं” यह तो उनके लिए है जो गलत नहीं है और यहाँ यह सभी जानते हैं कि मैं गलत हूँ. “यह गलत है” यह तो उनके लिए है जो सही हैं और सभी जानते हैं कि मैं गलत हूँ तो मुझसे सही की उम्मीद एक बेईमानी होगी. …………….यह आपकी बाते मुझ जैसे बदतमीज़, अमर्यादित, सनकी, लोगों पर लागू नहीं होती.

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2013

    अनिल कुमार अलीन जी …………. मेरी आपसे लड़ने में कोई रूचि नही है ! आपने कहा कि ” लगता है दुनिया में सबसे ज्यादा समझदार आप ही हैं ” ………….मैंने तो ये कभी नही कहा कि मैं ही सबसे ज्यादा समझदार हूँ दुनिया में ……आप ही हर किसी के ब्लॉग पर जाकर अपने ज्ञान का ढिंढोरा पीट रहे हैं ..! मैंने तो कभी किसी कि पोस्ट पर जाकर या कही किसी से ये नही कहा कि आप लोग सभी गलत हैं बस एक मैं ही सही हूँ, मैं ही ज्ञानी हूँ , ये काम तो आपका ही है जिसे आप बखूबी कर रहे हैं ! दूसरे आपने कहा कि मैं झूठ में जी रही हूँ …आपसे सिर्फ इतना पूछना चाहूंगी कि आखिर आप मुझे जानते कितना हैं ?? और क्या जानते हैं मेरे बारे में जो आपने ये कह दिया कि तुम झूठ में जी रही हो??? आलोचना करने का इतना ही शौंक है आपको तो पहले जाइये एक अच्छे आलोचक बनिए ! तब जाकर आलोचना करिये गा…. ये आप जिसे आलोचना कह रहे हैं ये मात्र आपकी एक बनी बनाई सोच के अलावा और कुछ नही है ! “कुछ भी बोलने से पहले ये समझ लिया करिये कि आप बोल क्या रही हैं ” मुझे अच्छे से पता है कि मैं क्या बोलती हूँ लेकिन शायद आप ही हर समय नशे में रहते हैं और हाँ दुसरो को शिक्षा देने से पहले अपने अंदर झांक कर देखिये …….आप चाहे जिसे जो बोल दे वो कुछ नही और बोलने के बाद नाम दे देते हैं कि हम तो मज़ाक कर रहे थे …अरे पहले खुद को सलाह दीजिये ….और खुद को सुधारिये …!”अभी जा रहा हूँ परन्तु याद रखियेगा जब भी आपकी बिमारी बढ़ेगी आपका इलाज़ करने आऊंगा……………आप पहले जाकर अपना इलाज करवा आइये कहीं ऐसा न हो कि दुसरो का मज़ाक उड़ाते उड़ाते , दुसरो का इलाज करते करते किसी दिन आपको कोई उठाकर पागल खाने में न छोड़ आये …… और अब आखरी बार आपसे ये कह रही हूँ कि आप चाहे जहाँ जाकर अपने ज्ञान का प्रदर्शन करे लेकिन मेरी पोस्ट से दूर ही रहे ! मुझे न तो आपसे कोई बात करनी है और न ही आपकी कोई बात सुननी है ! और न ही मेरे पास इतना समय है कि आपकी बकवास में आपका साथ दूँ ! इसलिए अच्छा यही रहेगा कि आप समझ जाये वरना अगर मैंने फिर कुछ कह दिया तो आप फिर यहाँ से रोते हुए भागेंगे …. कृपया अब कोई कमेंट न करे …………आपकी अति कृपा होगी …..

    December 8, 2013

    कोई रूचि नहीं………………….समय नहीं……………………तो फिर यह क्या है…………………….? आपने जो कुछ भी कहाँ उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि यह आपके अन्दर की तिलमिलाहट है. कभी-कभी होता जब बिमारी बढ़ जाती है या गलतफहमी हो जाती है कि सामने वाला कुछ नहीं जानता मेरे बारे में……………………………………………………अब इतनी जल्दी दवा फ़ायदा थोड़े नहीं करेगी…………….. आप पूछ रही है न कि मैं क्या जानता हूँ आपके बारे में. तो सुनिए वह सब कुछ जो आप दुसरे से छुपाई सिवाय दो-चार को छोड़कर उसमे से सरिता दी भी है. परन्तु मैं वह भी जनता हूँ जो आप उनसे छुपाई है. संभवतः हर बार खुद के सिवा दूसरो को बतायी नहीं जाती…………मैं किसी के दो-चार बातों और पोस्टो को पढ़कर पता लगा लेता हूँ कि आखिर यह बिमारी क्या है? आपको क्या लगता है कि आप किसी और दर्द और पीड़ा को माँ , राम या सीता माँ इत्यादि के कैरेक्टर से जोड़कर सबको धोखा दे रही है तो मुझे भी दे देंगी. अब सरिता दी, से मत लादियेगा कि यह सब मुझसे आपके बारे में वह बताई है क्योंकि मैं किसी से बात करता हूँ तो सिर्फ अपने और उसके बारे में किसी तीसरे के बारे में नहीं. जिससे बात करनी होती और जो बात करनी होती और जब बात करनी होती है……उपयुक्त समय का इंतज़ार नहीं करता ………….जैसे कि मुहे अनजानी से प्यार हुआ और मैं उससे शादी करना चाह रहा था तो बाते घुमाने की बजाय सीधे पहले दिन ही बोल दिया था ……..कि अनजानी मैं आपसे शादी करना चाह रहा हूँ……………. देखिये कहाँ से कहाँ चला गया तो बात हो रही है आपकी. जब आपकी बिमारी को आपके लेख के माध्यम से पकड़ा था तभी विलम्ब किये बिना आपके इलाज में लग गया . कुछ समय के लिए आपसे दूर रहना भी मेरे इलाज़ का हिस्सा था. सब पूछियेगा परन्तु फिर कभी मत पूछियेगा कि क्या जानता हूँ आपके बारे में. वरना बता दिया तो तमाशा बन जाएगा आपका……………..वैसे भी घटिया इंसान तो मैं हूँ पर इतना नहीं कि किसी के प्यार का तमाशा बनाऊ …………आख़िरकार मैं भी किसी का प्रेमी हूँ……… आपका कहना, “…. कृपया अब कोई कमेंट न करे …………” इसका मतलब कि दवा अब आपको असर करनी शुरू कर दी है. इलाज़ के शुरुवाती दिन में ऐसा होता है जब मरीज डाक्टर से भागता है क्योंकि यह बिमारी कुछ ऐसी है. परन्तु यह संकेत है कि आप जल्द ही ठीक हो जाएँगी. फिर चला जाउंगा एक नए बीमार की तलाश में. परन्तु आपसे एक विनती है कि जब आप ठीक हो जाए तो फिर यह बिमारी मत पलियेगा क्योंकि और भी लोग है इलाज़ करने को. एक आप ही नहीं जिसे लेकर बैठा रहा हूँ……….बस यूँ समझ लीजियेगा यह फीस है मेरी……………………………………………………………….जब दिल ही टूट गया हम जी कर क्या करेंगे…..जब दिल ही टूट गया………..जी क्या करेगेगेगेगेगेगेगेगे………………………गेगे………………हाँ……………..हाँ………………हाँ…………………..जाने क्यों मोहब्बत किया करते हैं दिल के बदले दर्दे-दिल लिया करते है…………जाने क्यों………..क्यों………क्यों………….? हाँ……………….हाँ……………….हाँ……………………..

jlsingh के द्वारा
December 3, 2013

उत्तम पोस्ट! बस इतना ही काफी है, बाकी तो विभिन्न विद्वानो ने अपनी अपनी राय रक्खी है! सीय राम मय सब जग जानी, करउ प्रणाम जोड़ी जुग पाणी!

    Sonam Saini के द्वारा
    December 4, 2013

    नमस्कार सर जी ……….आपने अपना कीमती समय दिया ….तहे दिल से इसके लिए शुक्रिया ….

sinsera के द्वारा
December 1, 2013

बहुत साफ साफ समझ में नहीं आया कि अपने कहना क्या चाहा है सोनम..बस एक बात समझ में आयी कि अपना अपना रोल प्ले करना है, लोग उसका आकलन चाहे जैसे करें…हमारे उत्तर भारत में राम पूजनीय हैं और दक्षिण भारत में रावण की पूजा होती है….कहानी एक ही है लेकिन लोग उसमे अलग अलग पहलू देखते हैं…मुझे तो रावण से ज़यादा चरित्रवान कोई नहीं दीखता …..राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम थे लेकिन रावण ने राक्षस जाति का होते हुए भी सीता माता पर कोई अनाधिकार बल प्रयोग नही किया ,वो चाहता तो उन्हें ज़बरदस्ती अपनी पटरानी बना सकता था लेकिन वो उन्हें घर तक नही लाया , अशोक वाटिका में ही रखा…उसको भी उनकी इज़ज़त की चिंता थी….खैर..आध्यात्मिकता की ओर आपके बढ़ते कदम मुबारक हों….

    Sonam Saini के द्वारा
    December 2, 2013

    मुझे बहुत दुःख हुआ कि मेरा लिखा हुआ आपको समझ नही आया ………. :( :( ………..वैसे मैंने बस इतना ही कहना चाहा है और जो मेरा मोटिव रहा है इस लेख को लिखने का कि सबने माता सीता कि पीड़ा का तो अंदाज़ा लगा लिया लेकिन कभी ये नही सोचा कि भगवान राम को कितनी पीड़ा से गुजरना पड़ा ! बाकि सब अपना अपना नजरिया है देखिये अब जिस रावण को लोग इतना कोसते हैं और जिसे बुराई का प्रतिक मानकर हर साल जिसका पुतला जलाते हैं उसके अंदर कि अच्छाई को आपने पहचान लिया ….. गुड …. :) तभी तो हम आपके विचारो के कायल हैं …. वैसे आपने मेरी बात नही समझी ……………… I don’t like this…. :( :(

deepakbijnory के द्वारा
November 30, 2013

व बहुत खूब रचना सोचने को विवश करती है

    Sonam Saini के द्वारा
    December 2, 2013

    धन्यवाद दीपक जी ………..

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 29, 2013

सुन्दर रचना है.. भगवान राम ने एक पति से ऊपर राजा को स्थान दिया एक सामाजिक पद जादा मायने रखता है 

    Sonam Saini के द्वारा
    December 1, 2013

    कीमती समय देने के लिए फिर से धन्यवाद संजीव जी ….

    Sonam Saini के द्वारा
    December 1, 2013

    एक बार फिर से समय देने के लिए धन्यवाद संजीव जी

Dr MEERA के द्वारा
November 29, 2013

सोनम जी ,जब धर्म की स्थापना करनी होती है तो व्याख्याकार  सब सही सिद्ध करते ही व्याख्या  करता है ,वास्तविक धरातल में भगवन राम की यह सबसे बडी  भूल थी ,मर्यादा तो अवस्य स्थापित की ,लेकिन तब से स्त्री जाति  के लिए पुरुषों द्वारा एक आदर्श स्थापित हो गया कि भूल करोगी तो त्याग दिया जायेगा ,पश्चिमी देशों ने तो इसे पूरे मन से अपनाया ,शायद राम की भक्ली को उन्होंने ही अपनाया 

    Sonam Saini के द्वारा
    December 1, 2013

    नमस्कार मीरा मैम ………….. आपने अपने विचारो से अवगत कराया और अपना कीमती समय blog को दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद …..

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
November 29, 2013

आदरणीय एवं पूजनीय सोनम सैनी जी…चरणस्पर्स..!!! सूफी को आपका लेख अच्छा लगा क्या खूब लिखती हैं आप, एक एक शब्द मोती जैसे, मज़ा आ गया, इतना भाव, इतना भाव के मैं तो रोने वाला था…! (वैसे माफ़ कीजियेगा मैं ने आपका लेख अभी पढ़ा नहीं है लेकिन उम्मीद करता हूँ कि आपने अच्छा ही लिखा होगा…..)

    Sonam Saini के द्वारा
    December 1, 2013

    प्रतिक्रियाओ की संख्या में इजाफा करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया …

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 28, 2013

सुन्दर रचना है अपने विचारों से अवगत करायें,,,

    Sonam Saini के द्वारा
    December 1, 2013

    धन्यवाद संजीव जी ……………..

yogi sarswat के द्वारा
November 28, 2013

रामायण से मुझे दो बाते समझ में आती हैं पहली ये कि हम सभी इस दुनिया में एक चरित्र प्ले करने आये हैं। सभी का अपना-अपना काम है जिसे सबको करना है। जिस दिन वो काम खत्म उस दिन मृत्यु हो जाती है फिर चाहे वो किसी भी कारण से हुई हो। सब कुछ पहले से निर्धारित है। कब किसके साथ क्या होना है सब पहले से ही तय हो चुका है हमे तो बस उस तय किये हुए को अपने कर्मो से लक्ष्य तक पहुँचाना है। और दूसरी बात जो मुझे समझ में आती है वो ये कि पीड़ा का रिश्ता किसी स्त्री पुरुष से नही है यह तो हर उस जीव से जुडी है जिसने इस धरती पर जन्म लिया है फिर वो चाहे किसी भी रूप में हो। ये कलियुग है सोनम जी , ये सब जानते हैं कि हम यहाँ मात्र कुछ वर्षों के लिए ( अध्यात्म के अनुसार कुछ सेकण्ड्स ) के लिए ही आये हैं लेकिन इसी पल में कोई कोई क्या कर देता है ! कोई अपनी जगह बना लेता है कोई सीधे आता है चला जाता है ! भगवान् राम कि जो कहानी आपने कही है , मुझे नहीं लगता भगवान् राम के ऊपर गम्भीर सवाल उठाये जाते हैं ! एक सार्थक बहस को जन्म दिया है आपने !

    Sonam Saini के द्वारा
    November 28, 2013

    “गम्भीर सवाल” मुझे ठीक से समझ नही आया कि आपने क्या कहना चाहा है सर …..

    yogi sarswat के द्वारा
    November 28, 2013

    मतलब ये कि हो सकता है तुम्हें ये लगता हो कि भगवान् राम के ऊपर , जैसा तुमने लिखा है कि सीता मैया के ऊपर भगवान् ने कुछ अत्याचार किये ,( मैं नहीं मानता ) उसी परिपेक्ष्य में मैंने अपनी बात कही है ! यही गम्भीर सवाल है प्रिय सोनम !

    Sonam Saini के द्वारा
    November 28, 2013

    मुझे लगता है कि आपको मेरे इस लेख को दोबारा आराम से पढ़ना चाहिए, जल्दी जल्दी में आपने गलत अर्थ निकल लिया सर, आई ऍम सॉरी टू से बट इट्स ट्रू ! मैं तो ये मानती ही नही हूँ कि भगवन राम ने सीता माता पर अत्याचार किये हैं !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 28, 2013

अत्यंत सुन्दर भावनाप्रधान प्रस्तुति ! बधाई !!

    Sonam Saini के द्वारा
    November 28, 2013

    नमस्कार आचार्य विजय गुंजन जी…………मेरी बात को समझने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद


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