Meri udaan mera aasman

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शब्द-शब्द जोड़ देना कविता नही कहलाता....(कांटेस्ट)

Posted On: 13 Jan, 2014 Contest में

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शब्द-शब्द जोड़ देना ही तो

कविता नही कहलाता

काफिये से काफिये का

मिला देना ही तो

कविता नही कहलाता

शब्दो को नियमो में

बांध देना ही तो

कविता नही कहलाता …

जब तक कि

भावनाओ से

सींचा न जाये शब्दो को ….

जब तक कि

कुछ रंग ख़ुशी और गम के

घोले न जाये

शब्दो के पानी में …

जब तक कि

शब्द उतर न जाये

दिल में पाठको के …

जब तक कि

हर शब्द खामोश रहकर भी

बोल न उठे ….

तब तक कहाँ बनती हैं कवितायेँ

क्योंकि ……

शब्द-शब्द जोड़ देना ही तो

कविता नही कहलाता …

काफिये से काफिये का

मिला देना ही तो

कविता नही कहलाता ….

और ……

शब्दो को नियमो में

बांध देना ही तो

कविता नही कहलाता …. !!!!


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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 22, 2014

बहुत बड़ा सच कहा सोनमजी आपने कवितायेँ दिल से निकल कर आतीं हैं ,शब्दकोष से नहीं ,बधाई

anilkumar के द्वारा
January 21, 2014

आदरणीय सोनम जी , कहीं नीरज जी का कहा पढा था , मनुष्य होना भाग्य है और कवि होना सौभाग्य । आप सौभाग्यशाली हैं ।

    Sonam Saini के द्वारा
    January 22, 2014

    आदरणीय अनिलकुमार सर नमस्कार ………..आपने सराहा इसके लिए शुक्रिया ……

Madan Mohan saxena के द्वारा
January 21, 2014

सुन्दर भाबपूर्ण प्रस्तुति . बढ़िया है आभार मदन कभी इधर नही पधारें

    Sonam Saini के द्वारा
    January 22, 2014

    धन्यवाद मदन मोहन सक्सेना जी ……..

ikshit के द्वारा
January 20, 2014

नियम तो सच में कभी कविता नहीं होते बहुत खूब – इच्छित

    Sonam Saini के द्वारा
    January 21, 2014

    इच्छित जी ब्लॉग पर आपका स्वागत है ….रचना को पसंद करने के लिए धन्यवाद ..

Piyush Aseeja के द्वारा
January 20, 2014

स्प्लेंडिड piece ऑफ़ work

    Sonam Saini के द्वारा
    January 21, 2014

    पियूष जी ब्लॉग पर आपका स्वागत है ……..रचना को सराहने व समय देने के लिए शुक्रिया

yamunapathak के द्वारा
January 18, 2014

Yes,heart’s call is called poem .प्रिय सोनम बहुत सही लिखा है ….. साभार

    Sonam Saini के द्वारा
    January 20, 2014

    आदरणीय यमुना मैम सादर नमस्कार …………. अपने अपना कीमती समय दिया व रचना को सराहा ………बहुत बहुत धन्यवाद मैम ….

yogi sarswat के द्वारा
January 17, 2014

इसीलिए तो मैं कविता नहीं लिख पाता! चलो तुमसे सीखूंगा ! सिखाओगी तो सही ?

    Sonam Saini के द्वारा
    January 17, 2014

    हहहहहहहहा……….. आप तो पहले से ही अच्छी कविताये लिख लेते हो भैया ….मैं नादाँ क्या सिखाउंगी आपको … :) समय देने के लिए धन्यवाद ….

sadguruji के द्वारा
January 16, 2014

लाजबाब पंक्तियाँ- जब तक कि भावनाओ से सींचा न जाये शब्दो को …. जब तक कि कुछ रंग ख़ुशी और गम के घोले न जाये शब्दो के पानी में … जब तक कि शब्द उतर न जाये दिल में पाठको के … जब तक कि हर शब्द खामोश रहकर भी बोल न उठे ….

    Sonam Saini के द्वारा
    January 17, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी नमस्कार ……..कीमती समय व प्रतिक्रिया देने के लिए आभार व धन्यवाद

Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
January 16, 2014

बहुत खूब समझाया आपने…

    Sonam Saini के द्वारा
    January 17, 2014

    धन्यवाद आदरणीय भगवान बाबू जी …

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 15, 2014

बिलकुल सही पर आजकल ज़्यादातर ऐसा ही होता है ! सोनम जी ! अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई !

    Sonam Saini के द्वारा
    January 16, 2014

    आदरणीय आचार्य विजय गुंजन जी नमस्कार ….. कीमती प्रतिक्रिया और समय देने के लिए आभार व धन्यवाद सर ..

yatindrapandey के द्वारा
January 15, 2014

हैलो, सोनम जी आपकी हर रचना सत्य के गलियारे मैं ही मिलती है वास्तिवक प्रस्तुति पर शायद आप और लिखना चाहती थी बीच में कही रुक गयी.

    Sonam Saini के द्वारा
    January 16, 2014

    हेलो यतीन्द्र पाण्डेय जी …….. रचना की सराहना के लिए शुक्रिया ….. :) शायद ……. मैं कविता को खीचना नही चाहती थी…बस सच लिखना चाहती थी …इसीलिए शायद आपको ऐसा लगा…

sanjay kumar garg के द्वारा
January 15, 2014

सोनम जी, ये वास्तविकता है, केवल शब्दों का जोड़-तोड़ करना ही कविता नहीं होती!

    Sonam Saini के द्वारा
    January 15, 2014

    आदरणीय संजय कुमार गर्ग जी नमस्कार ……. कीमती समय व प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद …

ranjanagupta के द्वारा
January 15, 2014

यही तो मेरा भी कहना है सोनम जी !कविता केवल भावो की उसी रूप में सम्प्रेष णीयता है जिस भाव में भीग कर वह लिखी जाये !वही गहरे भाव दूसरो को भी उद्वेलित कर जाये तभी काव्य की सफलता है !!

    Sonam Saini के द्वारा
    January 15, 2014

    आदरणीय रंजना गुप्ता मैम नमस्कार ………मेरे शब्दो समझने के लिए बहुत बहुत आभार व धन्यवाद

vaidya surenderpal के द्वारा
January 15, 2014

सही कहा आपने।

    Sonam Saini के द्वारा
    January 15, 2014

    आदरणीय वैद्य सुरेंदरपाल जी नमस्कार ……..ब्लॉग पर आपका स्वागत है …रचना को समय देने के लिए शुक्रिया

January 13, 2014

वाकई सच कहा मैडम आपने, जिगर साहब का एक शेर है “सिर्फ अल्फाज और बँदिश ही नहीँ है काफी, खूँ जिगर का चाहिए असर के लिए”

    Sonam Saini के द्वारा
    January 13, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद चित्रकुमार गुप्ता जी ……..रचना को समझने के लिए और त्वरित टिप्प्णी के लिए आभार व धन्यवाद …..

    jlsingh के द्वारा
    January 13, 2014

    सत्य वचन!

    Sonam Saini के द्वारा
    January 15, 2014

    धन्यवाद जे एल सिंह सर जी ….


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