Meri udaan mera aasman

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बंद आँखों से न जाने कैसे ……(कांटेस्ट)

Posted On: 27 Jan, 2014 Contest में

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बंद आँखों से न जाने कैसे
बूंद बूंद करके
बहते रहते हैं आंसू
बंद आँखों से न जाने कैसे ……


एक दिल के कारण
और भी न जाने क्या क्या
टूटता है रोज ही मेरे अंदर ……


गुजरा हुआ वक़्त
फिर से गुजर जाता है
सब कुछ होता सा नज़र आता है
बंद आँखों से भी न जाने कैसे …


बचपन की यादे हँसा देती हैं कभी
तो कभी माँ की कहानियां
जागती सी आँखों को
देती हैं नींद की थपकियाँ
आती है नज़र माँ भी
कभी खाना बनाते,
कभी हमारी बात पे मुस्कुराते
कभी घर के कामो में तल्लीन
कभी खाने की हमसे
फरमाइश पूछते
बंद आँखों से भी न जाने कैसे ……

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
January 29, 2014

गुजरा हुआ वक़्त फिर से गुजर जाता है सब कुछ होता सा नज़र आता है बंद आँखों से भी न जाने कैसे …… वाह , खूबसूरत शब्द प्रिय सोनम !

    Sonam Saini के द्वारा
    February 3, 2014

    धन्यवाद भैया ………

sadguruji के द्वारा
January 28, 2014

गुजरा हुआ वक़्त फिर से गुजर जाता है सब कुछ होता सा नज़र आता है बंद आँखों से भी न जाने कैसे ……बहुत अच्छी कविता.आपकी कविताओ में गोपियों की सी पीड़ा झलकती है.उधो वाले ज्ञान से भरी रचनाएं तो इस मंच पर भरी पड़ीं हैं,पर इस गोपी भाव या जीव के पीड़ा भाव भाव से भरी रचनाएं कम देखने को मिलतीं हैं.आप यूँ ही लिखतीं रहें और कांटेस्ट के लिए मेरी और से शुभकामनाएं.

सौरभ मिश्र के द्वारा
January 27, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति

    Sonam Saini के द्वारा
    January 28, 2014

    रचना को समय देने के लिए शुक्रिया सौरभ मिश्र जी …………..

sanjay kumar garg के द्वारा
January 27, 2014

अच्छी अभिव्यक्ति है, सोनम जी! आभार

    Sonam Saini के द्वारा
    January 28, 2014

    धन्यवाद संजय कुमार गर्ग जी ………

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 27, 2014

एक दिल के कारण और भी न जाने क्या क्या टूटता है रोज़ मेरे अंदर , बहुत मौलिक सी बात ,एक भावनाओं में भीगी कविता . बधाई ,सोनम जी . निर्मला सिंह गौर

    Sonam Saini के द्वारा
    January 28, 2014

    आदरणीय निर्मला मैम सादर नमस्कार ….. रचना को पसंद करने व समय देने के लिए तहे दिल से शुक्रिया


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