Meri udaan mera aasman

हार नही है जीत नही है जीवन तो बस एक संघर्ष है ........

40 Posts

781 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14347 postid : 699099

मेरा कद बौना है मगर मैं आसमाँ हूँ …

Posted On: 5 Feb, 2014 Others,social issues,कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आज मैं थोडा असमंजस में हूँ ! शुरुआत कहाँ से करूं समझ नही पा रही हूँ ! कविताओ से खेलना मेरा शौंक है मगर बात जब लेख की आती है तो मैं घबरा जाती हूँ ये सोचकर कि शुरुआत कैसे करूं अपनी बात की ! असल में जिंदगी मेरे लिए इतने सवाल खड़े कर देती है कि मैं जवाब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते पागल हो जाती हूँ ! कई बार जवाब मिलते भी हैं और कई बार खाली हाथो को रिक्त निगाहो से घूरना भी पड़ता है !


जीवन एक चक्र से होकर गुजरता है, एक प्रक्रिया से होकर ! जो लोग ईश्वर को नही मानते उनसे एक सवाल है मेरा कि “प्रकृति को देखो, पेड़-पौधो को देखो, जीव-जन्तुओ को देखो, जानवरो और इंसानो को देखो फिर कहो कि कौन है वो जो इन सभी को संचालित करता है ? इन सभी को जीवन देता है ? कौन है वो जो पेड़ो को फल, फूल, बादलो को अनेको-अनेक रंग, मौसम को सर्द गर्म एहसास प्रदान करता है ? कौन है वो जो शरीर और आत्मा के मध्य सांसो की एक डोर बांध देता है ? जब तक ये डोर बंधी होती है तब तक दोनों आपस में जुड़े रहते हैं, जिस दिन ये डोर टूटी उसी दिन दोनों का एक कहलाने वाला अस्तित्व पृथक-पृथक हो जाता है !


जब भी कोई भी जीवन इस पृथ्वी पर जन्म लेता है तो वह अपने सबसे सूक्ष्म रूप में होता है फिर चाहे वो मानव हो, जीव-जंतु, जानवर, पेड़-पौधे, फल-फूल, या कुछ और ! जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे ही उस सूक्ष्म जीवन का आकार व रंग रूप भी बदलने लगता है ! एक छोटा सा बच्चा उम्र की सीढ़ियों पर चढ़ते -चढ़ते कब बुढ़ापे की दहलीज पर पहुँच जाता है वक़्त की रफ़्तार उसे इस बात का एहसास भी नही होने देती !


यूँ तो इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले हर एक जीवन का रंग रूप, आकार उसके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है लेकिन शायद इंसान से कम ! एक इंसान का रंग-रूप, उसकी लम्बाई उसके लिए तो महवपूर्ण होती ही है लेकिन उससे कहीं ज्यादा इस समाज, इस दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होती है !यदि किसी इंसान का रंग थोडा सावंला है तो घर से निकलते ही न जाने कितनी नज़रे “अरे कितना काला/काली है” कहते हुए उसे घूरती हैं ! अगर शक्ल-सूरत अच्छी नही है तो भी लोग उँगलियाँ उठाने लगते हैं ! सीधे-सीधे शब्दो में अगर कहूं तो अगर आपका रंग-रूप, शक्ल सूरत अच्छी नही है तो इस समाज का हिस्सा होते हुए भी आपको उपेक्षित समझा जाता है, ताने मारे जाते हैं ! ऐसी स्थिति में इंसान इस एक जुमले को दोहरा कर अपने मन को बहलाता है कि “ये रंग रूप तो ईश्वर की देन है, कोई भला कर भी क्या सकता है” !


वास्तव में ऐसा ही है ! किसी भी इंसान का रंग-रूप, लम्बाई ईश्वर की ही देन है ! कुछ लोग बहुत लम्बे हो जाते हैं और कुछ बहुत बौने रह जाते हैं ! लेकिन ईश्वर की कृति पर सवाल उठाना तो इंसान का प्रथम कार्य है ! किसी भी इंसान की लम्बाई को लोग उसके खाने-पीने, रहन-सहन इन सब से जोड़ देते हैं ! अगर किसी का कद छोटा है तो अक्सर लोग ताना मार देते हैं कि “खाने-पीने को ठीक से नही मिलता होगा” या फिर पोष्टिक खाना नही मिलता होगा जिसकी वजह से कद छोटा रह गया है ! कई बार जब लोग पूछते हैं कि तुम्हारी लम्बाई कितनी है तो दिल करता है कि ऐसा जवाब दूँ कि आगे से फिर कभी कुछ पूछे ही न !


अगर कद छोटा हो तो सबसे ज्यादा दिक्कत शादी- ब्याह में आती है ! बन्दे का नेचर व्यवहार आचरण अच्छा है कि नही ये सवाल बाद में पूछा जाता है, पहले ये पूछ लिया जाता है कि कद-काठी कैसी है ? लम्बाई तो सही है न ? रंग रूप कैसा है ?


इस सभ्य समाज में लोग न जाने क्यों एक इंसान को उसके गुणो से कम, उसकी कमियों से ज्यादा पहचानते हैं ! इंसान लाख अच्छा हो, उसका दिल चाहे कितना भी बड़ा हो, वो चाहे कितना भी भला हो अगर वो शारीरिक रूप से सुंदर नही है तो उसकी इन अच्छाइयों का बस अंश मात्र ही महत्त्व रह जाता है !


अभी कुछ दिन पहले टीवी पर कलर्स चैनल पर “इंडिया गोट टैलेंट” नामक रियल्टी शो का आगाज हुआ है ! जिसमे दो भाई एक 21 वर्ष और दूसरा 16 वर्ष डांस की परफॉरमेंस के लिए ऑडिशन देने आये ! यूँ तो उनकी उम्र 21 वर्ष व 16 वर्ष थी लेकिन उनकी लम्बाई लगभग 4-5 वर्ष के बच्चो जितनी थी ! उनके चेहरे पर जो चमक थी, जो आत्मविश्वाश था वो बता रहा था कि उन्हें अपने बौने होने पर दुःख नही था बल्कि अपने हुनर पर विश्वाश था कि वो सेलेक्ट हो ही जायेंगे ! दोनों भाइयो ने तीनो जज को न ही इम्प्रेस किया बल्कि उनका सिलेक्शन भी हो गया ! वो दोनों जितने समय मंच पर रहे बस मुस्कुराते ही रहे ! डर, नर्वसनेस की परछाई भी उनके चेहरे पर नज़र नही आ रही थी !


वो लोग जो अपने रंग-रूप या कद के कारण हीन भावना से ग्रस्त हो जाते है अगर वो सभी भी और बाकि सभी भी उन दोनों की ही तरह अपने हुनर को, अपनी प्रतिभा को अपना हथियार बना ले तो फिर इस दुनिया में कोई उन पर गलत शब्दो के, तानो के बाणो से हमला नही कर सकता ! अपने आप पर तब उन्हें भी गर्व होगा और वो कह सकेंगे कि ” मेरा कद बौना है मगर मैं आसमाँ हूँ …”!!!


अंत में एक छोटी सी कविता क्योंकि बिना कविता के मेरी बात पूरी नही होती………


बात विवाह की होती है जब
लोग पूछते हैं
लम्बाई कितनी है ?
रंग- रूप कैसा है ?
क्यों नही पूछता कोई ये
कि हुनर क्या हैं ?
क्यों तोली जाती है मानवता
रंग-रूप के तराजू में ?
क्यों निर्भर करती है
अच्छाई शारीरिक सुंदरता पर ?
इस क्यों का जवाब
पाना होगा …
खुद को इस लायक बनाना होगा
कि जब खुले जुबान लोगो की
मारने को ताने
और पूछने को
रंग-रूप, लम्बाई तो
बोले हुनर ….
दे हर जवाब प्रतिभा …
और कर दे चुप सभी को
कह कर ये कि….
“मेरा कद बौना है मगर मैं आसमाँ हूँ …”

https://www.facebook.com/sonamkinazam

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

23 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pakhi के द्वारा
March 28, 2014

बहुत सही लिखा है आपने. हमे अपने नजरिये को ही बदलना होगा , ताकि हम अपने काम और अपने नाम से पहचाने जाएँ.

kavita1980 के द्वारा
February 13, 2014

तुम भी कुछ मेरे जैसी हो —

    Sonam Saini के द्वारा
    February 17, 2014

    कविता जी ब्लॉग पर स्वागत है आपका ……… :) आपकी प्रतिक्रिया अच्छी लगी …. :) समय देने के लिए शुक्रिया …

aman kumar के द्वारा
February 12, 2014

उन दोनों की ही तरह अपने हुनर को, अपनी प्रतिभा को अपना हथियार बना ले तो फिर इस दुनिया में कोई उन पर गलत शब्दो के, तानो के बाणो से हमला नही कर सकता ! अपने आप पर तब उन्हें भी गर्व होगा और वो कह सकेंगे कि ” मेरा कद बौना है मगर मैं आसमाँ हूँ …”| लेख बहुत अच्छा है सोनम !

    Sonam Saini के द्वारा
    February 17, 2014

    देरी के लिए क्षमा चाहूंगी सर जी …… समय देने के लिए बहुत बहुत आभार व धन्यवाद …….

yogi sarswat के द्वारा
February 10, 2014

प्रिय सोनम ,पहली बात ये कि तुम जितनी बेहतर कविता लिखती हो उतना ही बेहतर ये लेख भी है ! अगली बात ! किसी ने मुझे एक बार कहा था -कि आदमी किसी दरवाजे के अंदर अपने रूप और रंग की वजह से जल्दी एंट्री कर जाता है लेकिन जब निकलता है तब उसके गुणों को याद किया जाता है उसके रूप को नहीं ! इसलिए रूप रंग को बिलकुल नकारा भी नहीं जा सकता और इसे पूर्ण रूप से स्वीकार भी नही किया जा सकता !

    Sonam Saini के द्वारा
    February 11, 2014

    तारीफ करने के लिए धन्यवाद भैया ……….

ranjanagupta के द्वारा
February 10, 2014

आपने सोनम जी ,अष्टावक्र नाम के महर्षि थे जो परम तपस्वी ,और उदभ ट विद्वान् थे ,उनकी याद दिला दी ,जिनको कभी पढा था ,जो शरीरिक रूप से आठ स्थान से टेढे थे !सब उनको देख कर हँ सते या नफरत से मुहँ फेर लेते पर ,जब उनके विचार या उनकी वाणी सुनते ,तो श्रद्धा से शीश झुका लेते !बहुत बहुत बधाई !!!

    Sonam Saini के द्वारा
    February 11, 2014

    आदरणीय रंजना मैम सादर नमस्कार ……..समय देने के लिए शुक्रिया मैम

सौरभ मिश्र के द्वारा
February 10, 2014

आपकी कविता का मै आदर और सम्मान करता हू और आपकी सोच की सराहना करता हू पर मै ईश्वर पे यकीन नही करता,क्योकि मैने न देखा, न महसूस किया और मै मात्र ऐका वर्ष से नास्तिक हुआ मै जानता हू आप मेरी बात का खण्डन करेगी पर मे पास ये सिद्द करने को बहुत तर्क है

    Sonam Saini के द्वारा
    February 11, 2014

    नमस्कार सौरभ मिश्र जी …….. जी मैं आपकी बात का खंडन नही करूंगी, ईश्वर है या नही इस बात पर मैं किसी के साथ बहस नही करना चाहती क्योंकि मैं जानती हूँ कि वो मेरे लिए तो हैं बाकि किसी के लिए अगर नही है तो वो उस इंसान की अपनी एक alag सोच है जिसे कोई भी चाहकर भी नही बदल सकता ……… आपने अपना कीमती समय दिया इसके लिए आभार व धन्यवाद ………..

sadguruji के द्वारा
February 10, 2014

आपके लेख और कविता का सार है-वो लोग जो अपने रंग-रूप या कद के कारण हीन भावना से ग्रस्त हो जाते है अगर वो सभी भी और बाकि सभी भी उन दोनों की ही तरह अपने हुनर को, अपनी प्रतिभा को अपना हथियार बना ले तो फिर इस दुनिया में कोई उन पर गलत शब्दो के, तानो के बाणो से हमला नही कर सकता ! अपने आप पर तब उन्हें भी गर्व होगा और वो कह सकेंगे कि ” मेरा कद बौना है मगर मैं आसमाँ हूँ … खुद को इस लायक बनाना होगा कि जब खुले जुबान लोगो की मारने को ताने और पूछने को रंग-रूप, लम्बाई तो बोले हुनर …. दे हर जवाब प्रतिभा … और कर दे चुप सभी को कह कर ये कि…. “मेरा कद बौना है मगर मैं आसमाँ हूँ.बहुत अच्छा लेख और उतनी ही अच्छी कविता.सार्थक,शिक्षाप्रद और उपयोगी रचना.आपको इस उत्कृष्ट कृति के लिए बधाई.

    Sonam Saini के द्वारा
    February 11, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी नमस्कार ……आपने अपना कीमती समय दिया व अपने विचार रखे ……..इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया

Angel के द्वारा
February 7, 2014

http://static-files.jagranjunction.com/pix/postacomment_bttn.gif hey you wrote very good..keep it up…. i also write poems…just take a look at my new creation…छूना है aasmaan

    Sonam Saini के द्वारा
    February 11, 2014

    एंजेल जी नमस्कार …..आपका ब्लॉग ओपन नही हो पा रहा है ..कोशिश की लेकिन असफल रही … आपने ब्लॉग को सराहा ……..शुक्रिया

jlsingh के द्वारा
February 5, 2014

जय माँ शारदे! बस और कुछ नहीं कहूंगा!

    Sonam Saini के द्वारा
    February 6, 2014

    जय माँ शारदे ……..नमस्कार आदरणीय जे एल सिंह सर जी ……..ये क्या कुछ भी नही कहा ??? :( , कुछ तो कहिये इतने से काम नही चलने वाला सर जी …….. :)

    jlsingh के द्वारा
    February 6, 2014

    ऐसा इसलिए कि प्रत्येक शब्द सत्य का रूप है, तुमने ज़माने की सच्चाई खोल कर रख दी है. अब कुछ भी लिखना सूरज को दीपक दिखाने जैसा होगा. माँ शारदे ने तुम्हे असीम विद्या दी है, बुद्धि दी है; इसलिए ही मैंने कहा – जय माँ शारदे!

    Sonam Saini के द्वारा
    February 6, 2014

    :) जी सर जी ….आपकी प्रतिक्रिया का अर्थ हम समझ गये थे लेकिन इतने से मन नही भरा तो पूछ बैठे ……. जय माँ शारदे … वो मुझ में हैं इसीलिए किसी एक विशेष दिन मैं उन्हें याद नही करती, हमेशा करती हूँ, …… ये दो लाइन माँ शारदे के लिए मेरी श्रद्धा सुमन के रूप में जिन्हे वो स्वीकार करे ऐसी उनसे प्रार्थना है …….. “ऐ माँ शारदे अपने चरण कमलो में मुझे स्थान दो, मेरी बेनाम सी इस जिंदगी को अपना नाम दो, यूँ ही सदा विराजमान रहो माँ तुम मुझमे, हे माँ शारदे इतना मुझे वरदान दो …. ….

mrssarojsingh के द्वारा
February 5, 2014

हुनर के कद्रदान मिलते तो हैं पर किस्मत से वर्ना तो कितने ही लोग कमियों के कारण कुंठा से भरा जीवन बिताने पर मजबूर हैं ..कृत्रिम चमक दमक की इस आज की दुनिया में कितनी ही प्रतिभाएं यूँ सिसक कर दम तोड़ देती हैं .. सोचने पर मजबूर करता है आपका यह सुंदर लेख ….. बधाई स्वीकार करें सोनम जी ..

    Sonam Saini के द्वारा
    February 6, 2014

    आदरणीय सरोज मैम नमस्कार ……… जी ये तो है कि सभी को मुक्कमल जहाँ नही मिलता …….ब्लॉग पर आने व प्रतिक्रिया हेतु तहे दिल से शुक्रिया …….ब्लॉग पर स्वागत है आपका …………

deepakbijnory के द्वारा
February 5, 2014

AADARNIYA सोनम जी कसी KAMI KO किसी प्रतिभा से संतुलित करने कि जरुरत नहीं है वरन यदि सच्चा प्यार है तो जो जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार करना चाहिए

    Sonam Saini के द्वारा
    February 6, 2014

    आदरणीय दीपक सर नमस्कार ……..आपकी पोस्ट पर आपका गलत नाम लिखने हेतु माफ़ी चाहूंगी …..पता नही कैसे गलती से लिखा गया ……..ब्लॉग पर आपका स्वागत है ,,,,,, जी मेरे कहने का ये मतलब नही था कि प्यार को स्वीकार करने के लिए अपनी कमी को हुनर से संतुलित करे, बल्कि मेरी बात का ये आशय था कि कोई किसी पर किसी की कमी से कारन, कद या रूप-रंग के कारन ऊँगली न उठाये …….उसे ताने न दे ……..प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद सर …….


topic of the week



latest from jagran