Meri udaan mera aasman

हार नही है जीत नही है जीवन तो बस एक संघर्ष है ........

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इच्छा जिंदगी की ....

Posted On: 10 Mar, 2014 Others में

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चाँद सितारे …
अब तक दूर से देखे
अब पास जाने की इच्छा है
बादलो में खो जाऊं
अब बन धूल
उड़ जाने की इच्छा है …….
जीवन पथ पर बढ़ते-बढ़ते
जो था सब पीछे छूट गया
खून से रिश्ते जुड़े रहे
दिल से हर रिश्ता टूट गया …
अब हो जाऊं या मैं उनकी
या हर एक बंधन तोड़ चलूँ
जीवन के सीधे रास्ते को
अब एक मोड़ देने की इच्छा है ….
आज़ादी क्या होती है
आओ तुमको बतलाऊँ
पिंजरे में कर कैद रोज ही
ऊंचाई आकाश की नपवाऊँ …
हुए नही सफल अगर तो
सारा ही दोष तुम्हारा है
मेहनत में होगी कमी कोई
जो पंख होते हुए भी हारा है ………
छोड़ के जग और तोड़ के बंधन
अब मेहनत को अपनी इल्जामो से
मुक्त करने की इच्छा है ……
प्यार, प्रेम और इश्क़, वफ़ा
सब बाते हैं बेकामो की
जिनके पास है काम बहुत
उन्हें फ़िक्र ही कहाँ जज्बातो की
सब छोड़-छाड़ कर
अब कुछ काम करने की इच्छा है ……
चाँद सितारे …
अब तक दूर से देखे
अब पास जाने की इच्छा है
बादलो में खो जाऊं
अब बन धूल
उड़ जाने की इच्छा है ……. !!!

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 12, 2014

प्यार, प्रेम और इश्क़, वफ़ा सब बाते हैं बेकामो की जिनके पास है काम बहुत उन्हें फ़िक्र ही कहाँ जज्बातो की सब छोड़-छाड़ कर अब कुछ काम करने की इच्छा है ……यहांपर मुझे लगता है कि एक अधूरा सत्य है.ये मन का गुबार है,जो कुंठा के रूप में व्यक्त हुआ है.हर व्यक्ति के जीवन में प्रेम की तलाश जन्म से लेकर मृत्यु तक जारी रहती है.सफलता के बाद भी आदमी प्रेम तलाशता है और असफलता के बाद भी.करियर बनाने कि दृष्टि से एक उत्कृष्ट प्रयास के लिए आपको बहुत बहुत बधाई.

    jlsingh के द्वारा
    March 12, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! ये लड़की थोड़ी नासमझ है …कुछ भी ऊटपटांग इसके मन में आता है लैपटॉप पर लिख जाती है …चाँद तारों पर जायेगी फिर कभी उससे भी ऊपर जायेगी, …लेकिन कविता तो ऐसे ही बनती है न! जबतक मन में विकार, वियोग, विछोभ नहीं उत्पन्न होता कविता कहाँ बनती है …कभी कभी इसके ऊपर माँ शारदे भी सवार हो जाती है और वेदब्यास की भांति लिखने लग जाती हैं….

    Sonam Saini के द्वारा
    March 13, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी नमस्कार ………..जी आपने आधा आधा समझा …. वास्तव में प्रेम की तलाश इंसान को जन्म से लेकर म्रत्यु तक होती है ….लेकिन मेरा इशारा आज के हालत की और था, तलाश के बावजूद आज प्रेम करने (सच्चा प्रेम करने वाले) वालो को पागल का ही दर्जा दे दिया जाता है … ये करियर वाली बात समझ में नही आयी :) …. समय देने के लिए शुक्रिया सर जी …….

    Sonam Saini के द्वारा
    March 13, 2014

    आदरणीय जे एल सिंह सर जी नमस्कार ……….. हा हा हा हा ……….. चाँद- तारो के ऊपर भी कुछ होता है जहाँ जाया जा सके ???? मुझे तो लगा था कि चाँद तारो के बीच पहुँच कर फिर कहीं और जाने कि जरूरत नही पड़ती … :P :) , ………….वैसे कविता लिखने के लिए दुखी भी होना पड़ता है ….कविता बिना मन पर चोट लगे बनती ही कहाँ है … हैं न सर जी ??? सद्गुरु जी अभी मेरी कविताओ से परिचित नही हैं…. धीरे धीरे उन्हें भी आदत हो जायेगी मेरी कविताओ की …. :) वैसे माँ शारदे तो हमेशा ही मेरे साथ रहती हैं ……फिर चाहे कविता लिखूं या लेख …. :) समय देने के लिए शुक्रिया सर जी … :)

    Sonam Saini के द्वारा
    March 13, 2014

    धन्यवाद भैया … :)

sanjay kumar garg के द्वारा
March 10, 2014

भावपूर्ण अभिव्यक्ति! सोनम जी, बधाई!

    Sonam Saini के द्वारा
    March 11, 2014

    आभार व धन्यवाद संजय जी ……………


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