Meri udaan mera aasman

हार नही है जीत नही है जीवन तो बस एक संघर्ष है ........

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माँ कौन सी मिटटी की बनी होती है …????

Posted On: 9 Dec, 2014 कविता में

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उम्मीदे जब
बन-बन कर टूटती हैं
तो दिल में बेचैनी सी होती है
लगता है जैसे सब खत्म हो रहा हो
आँखे बेइंतेहा रोती हैं
अँधेरा सा छाने लगता है
आँखों के सामने
हर तस्वीर धुंधली सी
नज़र आने लगती है
यकीं खुद से उठने लगता है
ये दुनिया भी
बेरंग लगने लगती है
तब ख्याल माँ का आता है
पता नही किस मिटटी से
बनी होती है माँ
इतना सहने के बाद भी
कोई शिकायत कैसे नही करता ??
हैरान हो जाती हूँ
ये देखकर कि
प्रॉब्लम चाहे बड़ी हो छोटी
माँ के चेहरे पर
एक सिकन तक नही आती
इतनी हिम्मत कहाँ से आती है
आखिर माँ कौन सी
मिटटी की बनी होती है …????

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Maharathi के द्वारा
May 9, 2015

माँ से उऋण कोई नहीं है। श्रेष्ठ लेखन ….. । बधाई।डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी’ वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.) +919319261067 http://maharathi.jagranjunction.com/2015/05/08/करतब-बोध-घनाक्षरी-छन्द-2/

meenakshi के द्वारा
December 16, 2014

माँ पर बहुत उम्दा काव्य रचना . बहुत २ बधाई ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

sadguruji के द्वारा
December 15, 2014

प्रॉब्लम चाहे बड़ी हो छोटी माँ के चेहरे पर एक सिकन तक नही आती ! अच्छी रचना ! बहुत बहुत बधाई !

deepak pande के द्वारा
December 12, 2014

Ishwar ki apratim,rachna hai maadeepakbijnory.jagranjunction.com/2014/12/12/%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A5%9C%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A5%9B/

    Sonam Saini के द्वारा
    December 15, 2014

    आदरणीय दीपक पण्डे जी नमस्कार ….रचना को सराहने के लिए शुक्रिया …

abhishek shukla के द्वारा
December 11, 2014

अद्भुत। माँ मिटटी की बनी नहीं हो सकती….माँ पता नहीं किन भावनाओं की जननी है…बहुत सुन्दर शब्द सोनम जी।

    Sonam Saini के द्वारा
    December 15, 2014

    अभिषेक जी नमस्कार ….जी सही कहा आपने माँ मिटटी की बनी नही हो सकती ….प्रतिकिया और सराहना हेतु धन्यवाद ….

sanjay kumar garg के द्वारा
December 10, 2014

सोनम जी, सादर नमन! माँ को समर्पित सुन्दर कविता के लिए बधाई!

    Sonam Saini के द्वारा
    December 15, 2014

    आदरणीय संजय कुमार गर्ग जी नमस्कार ….समय देने और याद रखने हेतु धन्यवाद व आभार …

pkdubey के द्वारा
December 10, 2014

इस सृष्टि में मात्र माँ ही ममतामयी है,पिता पालनहार है पर ममतामयी नहीं | सादर साधुवाद मैम ,अच्छी रचना |

    Sonam Saini के द्वारा
    December 15, 2014

    आदरणीय pk dubey ji नमस्कार …..रचना को समय देने हेतु आभारी हूँ ..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
December 9, 2014

माँ अपना दर्द छुपा कर मुस्कुराती रहती है मुझे लगता है माँ को तभी तो ईश्वर तुल्य कहते हैं,बहुत सुंदर भाव पूर्ण रचना सोनम जी .

    Sonam Saini के द्वारा
    December 9, 2014

    आदरणीय मैम नमस्कार …सिर्फ सोनम ही कहें …जी न लगाये ….पहली प्रतिक्रिया और समय देने के लिए धन्यवाद …


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