Meri udaan mera aasman

हार नही है जीत नही है जीवन तो बस एक संघर्ष है ........

40 Posts

781 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14347 postid : 949157

क्या यही भारत निर्माण है ???

Posted On: 20 Jul, 2015 Others,social issues,कविता,Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जल रही हैं चिताएं रोज ही
नफरतो की आग से
बुझ रहे हैं चिराग
दुश्मनी बरसात से
देखते हैं रोज हम
कहता है कोई शान से
हो रहा है भारत निर्माण
देखते तो तुम भी हो
तो बताओ तो जरा
क्या यही है भारत निर्माण ??


खून के प्यासे हैं सब
या जिस्म की लिए भूख हैं
हैं मुखौटा इंसान का
अंदर से पिशाच व भूत हैं
नोचते हैं, मारते हैं
काटते हैं, खाते हैं
फिर भी कुछ बच जाये तो
बाजारों में बेच आते हैं …..
देखते हैं रोज हम
कहता है कोई शान से
हो रहा है भारत निर्माण
देखते तो तुम भी हो
तो बताओ तो जरा
क्या यही है भारत निर्माण ??


मर रही हैं ज़िंदगी
सरहदो पर रात दिन
है सवाल एक बस
हो सुरक्षा कैसे देश की ?
देश को कर के सुरक्षित
क्या मगर हो जायेगा
है सुरक्षित ही नही जब
माहौल अपने देश का ……
देशो को बांधा है जिन्होंने
अलग-अलग सीमाओ में
क्यों नही बांध पाये वो
इंसान को सीमाओ में
होती अगर सीमा कोई
इंसान की इंसान से
तब जरूरत ही न रहती
सरहदो पर जवान की
और न ही फिर रहती जरूरत
किसी कानून की ……
देखते हैं रोज हम
कहता है कोई शान से
हो रहा है भारत निर्माण
देखते तो तुम भी हो
तो बताओ तो जरा
क्या यही है भारत निर्माण ??


न बचे संस्कार अब
न चरित्र पवित्र रहा
देश का अधिकांश युवा
खुद को ही अब है छल रहा ….


नाम लेकर शिक्षा का सब
लूटते हैं बस पैसे अब
बन रहे हैं लोग ऊँचे
और गिर रहे हैं आदर्श उनके
रूपये लाओ, डिग्री ले जाओ
खुल रहे हैं अब कॉलेज ऐसे ……



देश में सरकार है
फिर भी गरीब लाचार है
हैं बहुत से कानून लेकिन
आँख-कानो से सब बेकार हैं
न देखते हैं, न सुनते हैं
महसूस की तो बात क्या
है अगर कातिल कोई
तो बस वही महफूज है
और अब बस क्या कहूँ
इतना सा ही ये सवाल है
देखते हैं रोज हम
कहता है कोई शान से
हो रहा है भारत निर्माण
देखते तो तुम भी हो
तो बताओ तो जरा
क्या यही है भारत निर्माण ??

Sonam Saini

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

19 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
September 23, 2015

है अगर कातिल कोई तो बस वही महफूज है । बिलकुल सटीक कविता लिखी है आपने आज के हालात पर । क्या यही है भारत निर्माण ? काश आपके इस सवाल का जवाब देने की हिम्मत वे जुटा सकें जो आज देश के कर्णधार बने बैठे हैं ।

    Sonam Saini के द्वारा
    September 29, 2015

    धन्यवाद सर ….

Shobha के द्वारा
August 13, 2015

प्रिय सोनम पहले भी प्रतिक्रिया दी थी मजबूरी सोनम बहुत अच्छी कविता परन्तु अधूरी इसमें बढती जनसंख्या बेहाल धरती बेहाल देश और एड होना चाहिए

sadguruji के द्वारा
August 12, 2015

देशो को बांधा है जिन्होंने अलग-अलग सीमाओ में क्यों नही बांध पाये वो इंसान को सीमाओ में ! बहुत सुन्दर भाव ! आदरणीया सोनम सैनी जी ! बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक चुने जाने पर बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई !

    Sonam Saini के द्वारा
    August 20, 2015

    आदरणीय सदगुरु जी सादर नमस्कार …..बधाई व आशीर्वाद हेतु बहुत बहुत आभार व धन्यवाद ….. आप सब लोगो की प्रशंसा से हिम्मत मिलती है अच्छा लिखने व करने की ….

Shobha के द्वारा
August 8, 2015

प्रिय सोनम जब तक देश की जनसंख्या पर रोक नहीं लगेगी देश और रसातल में चला जाएगा सोनम दुखी होती रहेगी अच्छी कविता

    Sonam Saini के द्वारा
    August 20, 2015

    आदरणीय मैम नमस्कार …..मुझे लगता है कि जनसँख्या अब उतना बड़ा मुद्दा नही है जितना कि संस्कार …..अगर माता -पिता अपने बच्चो को अच्छे संस्कार दे तो मुझे लगता है दुनिया की आधी से ज्यादा अपराध अपने आप खत्म हो जाये …..प्रतिक्रिया व स्नेह हेतु धन्यवाद व आभार मैम …..

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
August 7, 2015

सोनम जी निरास ना हो , भारत को ही शाॅति मार्ग का ज्ञाता माना जाता है । मोदी जी के शांति कारक योग के लिए किये  प्रयास निरर्थक हो जायेगे । क्रपया पोजिटिव वििचारों को उजागर कर भारत  वासियों का व अपना मननोबल बडायें ।वरना रामदेव के  शांति प्रदाता योग केन्द्रों का क्या होगा । कैसे होगी ओम शांति शांति 

    Sonam Saini के द्वारा
    August 20, 2015

    नमस्कार सर …..निराशा और आशा तो दोनों परस्थितियों पर निर्भर करती हैं ….जहां तक मेरी समझ कहती है ….. :) प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद …..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 6, 2015

प्रिय सोनम,बेस्ट ब्लॉगर की बहुत बधाई, तुम्हारी कविता भारत की सच्ची तस्वीर वयान कर रही है .स्नेह .

    Sonam Saini के द्वारा
    August 20, 2015

    आदरणीय मैम ….सादर नमस्कार …….स्नेह, आशीर्वाद व प्रशंसा हेतु बहुत बहुत आभार व धन्यवाद मैम …..

    Sonam Saini के द्वारा
    August 20, 2015

    .आदरणीय मैम ….सादर नमस्कार …….स्नेह, आशीर्वाद व प्रशंसा हेतु बहुत बहुत आभार व धन्यवाद मैम ….

jlsingh के द्वारा
August 6, 2015

हर कोई है देखता, पर सोचता भी है कोई/ देखकर कुछ सोचना, विदुषी की ही पहचान है/ कहता है कोई शान से हो रहा है भारत निर्माण देखते तो तुम भी हो तो बताओ तो जरा क्या यही है भारत निर्माण ?? नत मस्तक हूँ सोनम! तुम्हारी प्रतिभा के आगे! बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं यूं ही लिखती रहो झकझोड़ती रहो बस जोर से कुछ हिलेंगे, कुछ मिलेंगे कुछ कहेंगे शान से हो रहा भारत निर्माण! क्यों नहीं ? भई क्यों नहीं??

    Sonam Saini के द्वारा
    August 20, 2015

    नमस्कार चाचा जी ……….. देरी से रिप्लाई करने के लिए क्षमा चाहती हूँ …आजकल तबियत कुछ ठीक नही रहती है …. बहुत सारी तारीफ कर दी है आपने तो …इतनी तारीफ के लायक अभी खुद को नही समझती हूँ ….आप सब का आशीर्वाद बस यूँ ही मुझ पर बना रहे ….बहुत आभारी हूँ ….. धन्यवाद चाचा जी …

yamunapathak के द्वारा
July 26, 2015

प्रिय सोनम कविता बहुत अच्छी है . नैराश्य से निकालने वाले मुट्ठी भर लोग ही होते हैं चाहे वह घर हो समाज या देश ….. साभार

    Sonam Saini के द्वारा
    July 27, 2015

    बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मैम ………..

sadguruji के द्वारा
July 23, 2015

न बचे संस्कार अब न चरित्र पवित्र रहा देश का अधिकांश युवा खुद को ही अब है छल रहा ! आदरणीया सोनम सैनी जी ! सादर अभिनंदन ! बहुत सुन्दर और विचारणीय कविता ! बहुत बहुत बधाई !

    Sonam Saini के द्वारा
    July 25, 2015

    आदरणीय सद्गुरु जी नमस्कार …..बहुत बहुत धन्यवाद व आभार कविता के भावो को समझने के लिए …

Sonam Saini के द्वारा
July 23, 2015

क्या यही है भारत निर्माण ?


topic of the week



latest from jagran