Meri udaan mera aasman

हार नही है जीत नही है जीवन तो बस एक संघर्ष है ........

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नाउम्मीदी के बादल ......

Posted On: 14 Sep, 2015 Others,कविता में

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आजकल कुछ ठीक नही लग रहा है, हर तरफ अँधेरा ही अँधेरा नज़र आ रहा है, बैठे-बैठे आँखे भर आती हैं, कुछ भी अच्छा नही लगता, भूख लगती है तो खाना खा लिया जाता है, ज़िंदगी में कई बार मैं ऐसे ही बिखर जाती हूँ, टुकड़े-टुकड़े हो कर ! न हँसने का मन करता है न किसी से बात करने का, बस चुपचाप बैठे रहने का मन होता है !

ज़िंदगी को समझना नही चाहिए सिर्फ जीना चाहिए, ऐसा सुना है मैंने लेकिन ऐसा किया नही जाता, जिंदगी को जीने से पहले मैं समझने की कोशिश करने लगती हूँ, और मेरी हर कोशिश को तो नाकामयाब ही होना होता है !


सब कुछ बिगड़ता जा रहा है, न कुछ अच्छा हो रहा है न अच्छे विचार मन में आ रहे हैं, जब भी माँ बीमार होती हैं मेरी हिम्मत टूटने लगती है, पता नही वो क्यों बीमार पड़ती है, मन होता है कि उनकी जगह मैं ही बीमार पड़ जाऊं बस वो ठीक रहे हमेशा, वो बीमार होती हैं तो सब बिखरता सा नजर आने लगता है !


कुछ और लिखना अब बस में नही है, बस मन बहुत भारी हो रहा है, अंदर ही अंदर कुछ टूट रहा हो जैसे, क्या चुभ रहा है इतना कुछ समझ नही आ रहा, भावनाओ का ऐसा सैलाब मन में उमड़ रहा है कि न रोते बन रहा है न हँसते ….


दर्द दूर हो जाता है
मगर खत्म नही होता
कुछ तो है अंदर
जो रह-रह कर
चुभता रहता है   ……
आंसुओ की कुछ बूंदे
छलक पड़ती है आँखों से
वो कौन है जो
मेरे अंदर बैठकर रोता रहता है  ……
सिसकियाँ सुनती हूँ अक्सर
बंद तनहा कमरे में
है कोई तो जो मुझको
मुझसे ही जुदा रखता है  ……
छोड़ कर साथ मेरा सब दोस्त
मुझको तनहा कर गए
हम अकेले थे कल भी और
आज भी अकेले ही रह गए  ……
सोचती हूँ रिश्तो की
क्या बस यही सच्चाई है
दिल किया तो संग हो लिए
दिल किया तो छोड़ दिया  ……
अब न भरोशा खुद पर रहा
और न इन रिश्तो पर  ……
जितनी बची है ज़िंदगी
बस अकेले ही जीना है
किसी के साथ की अब उम्मीद नही
जानती हूँ कि
उम्मीदें अक्सर टूट जाया करती हैं  ….!!!
उम्मीदें अक्सर टूट जाया करती हैं  ….!!!


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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
September 23, 2015

प्रिय सोनम, तुम्हारी दर्द भरी कविता पढ़कर ऐसा लग रहा है जैसे कि किसी ने मुझे आईना दिखा दिया हो या मेरे होठों की बात छीन ली हो । मैं भी पिछले कुछ समय से ऐसे ही हालात और मानसिक दशा से गुज़र रहा हूँ । लेकिन मेरी अपनी हालत हूबहू ऐसी ही होने के बावजूद मैं आशावादी होने की ही सलाह दूंगा । मैं जानता हूँ कि दर्द दूर हो जाता है मगर ख़त्म नहीं होता । लेकिन सोनम, उसे सहना पड़ता है, जीना पड़ता है । मैं यह भी जानता हूँ कि उम्मीदें अक्सर टूट जाया करती हैं । बहुत टूटी हैं मेरी उम्मीदें भी । लेकिन फिर भी उन्हें फिर से जोड़ना पड़ता है क्योंकि उम्मीद के बिना जिया नहीं जा सकता । बुझ रहे हैं एक-एक करके अक़ीदों के दिये, इस अंधेरे का भी लेकिन सामना करना तो है । हौसला रखो सोनम । मैं भी रखता हूँ । वो ज़िन्दगी का सफ़र हो कि जंग का मैदान, मुहाज़ कोई भी हो, हौसला ज़रूरी है । और याद रखो - जिसके पास आशा है, वो लाख बार हारकर भी नहीं हारता । हमें हारना नहीं है । हार मान लेना आसान होता है । हम मुश्किल काम करेंगे । ज़िंदगी से जूझने का मुश्किल काम । कोई साथ न हो तो अकेले चलेंगे । अगर चारों तरफ़ अंधेरा है तो अंधेरे को ही हमसफ़र समझकर चलेंगे । लेकिन ठहरेंगे नहीं, थकेंगे नहीं, हारेंगे नहीं ।

    Sonam Saini के द्वारा
    September 29, 2015

    नमस्कार जीतेन्द्र माथुर जी …..मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है ……ये के शेर बहुत पहले मैंने लिखा था ….. पढ़ा ग़ालिब को तो ये ख्याल आया एक मैं ही नही बर्बाद और भी हैं इस दुनिया में …………… आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर अचानक ही ये शेर मुझे याद आ गया …..आपकी हर एक बात से मैं सहमति रखती हूँ …..उम्मीदे बनती भी हैं और बनकर टूटती भी हैं और फिर टूट कर फिर से जुड़ जाती हैं ,,,,यही तो जीवन का आधार है वरना तो इंसान कुछ ही पलो में मर जाये …..आप ब्लॉग पर आये और अपने विचार रखे इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया सर ….धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
September 20, 2015

देखो जी किरण सी लहर आई आई आई रे हंसी आई!… मई नहीं चाहता चिर सुख मैं नहीं चाहता चिर दुःख, सुख दुःख की आँख मिचौली खोले जीवन अपना मुख. नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ नाम करो. मैं अपने स्कूल में बहुत ज्यादा हँसता था. कोई कुछ हंसाने वाली बात कह देता मै हंसाने लगता. एक दिन मेरे प्रिय शिक्षक हिंदी पढ़ा रहे थे. एक लड़का उनकी बात का नक़ल कर रहा था और मैं हंस पड़ा. मुझे हँसते देख टीचर जी ने मुझे बुलया और पुछा -क्यों हंस रहे हो? मै जवाब न दे सका बल्कि हँसता ही रहा. उन्होंने मुझे पूरे पूरे क्लास के सामने मुर्गा बना दिया और कहने लगे – जो हमेशा हँसता रहता है, उसे दुःख या कष्ट का भान नहीं होता – जो दुःख को नहीं समझ सका, वह व्यक्ति अच्छा कलाकार नहीं हो सकता, अच्छा साहित्यकार नहीं हो सकता …इसलिए रोना भी जरूरी है. मैं रोने लगा, सबके सामने, शर्म से, क्योंकि मुझे सबके सामने मुर्गा बनना पड़ा . टीचर को दया आ गयी. उन्होंने कहा- “उठो, मर्द रोते नहीं ” और मैं चुप हो गया. अब मैं जल्दी नहीं रोता पर रो पड़ता हूँ, किसी भी लड़की की बिदाई पर, सच में या फिल्मों में भी. मुझसे किसी बेटी/लड़की का दुःख देखा नहीं जाता. इसलिए मेरी बेटे तुल्य सोनम, मत हो उदास! देखो तुमसे भी दुखी लोग इस संसार में हैं. माँ की देखभाल करो, अपना भी ख्याल रक्खो. कमजोर न बनो. अंदर से मन को मजबूत रक्खो और कागज पर या कम्प्यूटर पर अपनी भवन को व्यक्त कर दो जैसा की तुम करती हो. अंदर का दुःख बहार आ जायेगा. अपने आप को ब्यस्त रक्खो. ज्यादा देर अकेली न रहो.पुस्तकें सहारा का काम करती है. …कोई पास न रहने पर भी जान-मन मौन नहीं रहता, आप आपसे कहता है वह आप आपसे है सुनता …इतना काफी है. शोभ जी और निर्मल जी ने भी उचित सलाह दी है ..ये सभी कभी तुम्हारी जैसी ही रही होंगी.

    Sonam Saini के द्वारा
    September 29, 2015

    नमस्कार चाचा जी …… क्या कहूँ बस आप सभी का आभार व्यक्त कर सकती हूँ …. अपनी भावनाओ को व्यक्त करने की कोशिश करती रहती हूँ लेकिन कई बार ऐसा होता है कि भावनाए भी व्यक्त नही हो पाती बस लगातार आँखों से आंसू बहते रहते हैं …. आपके स्कूल वाला किस्सा अच्छा है ….. पहले अक्सर स्कूल में मुर्गा बना दिया जाता था …. …मार्गदर्शन हेतु धन्यवाद चाचा जी …

Shobha के द्वारा
September 16, 2015

प्रिय बेटी सोनम डिप्रेशन को जितना गले लगाओ वह उतना आपके पास आता हैं यह एक ऐसी लग्जरी है जिसे व्यस्त व्यक्ति अफोर्ड नही कर सकता एक बार एक गाना सुना था जीवन में इतने गम हैं मेरा गम कितना कम है खूब लिखो जैसी प्यारी कविताये लिखती थी लिखों पढ़ सको तो मेरा एक लेख पढों क्वीन बी मेरी माँ के बारे में जैसी हंसती तुम्हारी फोटो है वैसे हंसती रहों

    Sonam Saini के द्वारा
    September 19, 2015

    आदरणीय मैम सादर नमस्कार ……इतने प्यार से आपने समझाया है बहुत अच्छा लगा …बहुत बहुत धन्यवाद मैम ….आपका लेख पढ़, मैंने मनु भंडारी जी का एक लेख भी पढ़ा था जिसमे उन्होंने अपनी माँ के बारे में लिखा था …. आपका लेख सिर्फ माँ के बारे में नही है बल्कि आपकी भावनाओ के बारे में, उस जीवन यात्रा के बारे में है जहां सुख भी थे और दुःख भी काम नही थे …..सही कहा है आपने कि व्यस्त व्यक्ति डिप्रेशन को अफ़्फोर्ड नही कर सकता ……मन पर कई बार बोझ इतना बढ़ जाता है कि मैं सह नही पाती, जब अपने हाथो में कुछ न हो तो सब भगवान पर छोड़ देना चाहिए, मैं भी अब बस यही कर रही हूँ ….धन्यवाद मैम ….

Shobha के द्वारा
September 16, 2015

प्रिय सोनम अभी तुम्हारी उम्र ही कितनी है तुम इतनी मर्म स्पर्शी कविता लिखने लगी उम्मीदें अक्सर टूट जाया करती हैं ….!!! उम्मीदें अक्सर टूट जाया करती हैं ….!!! उम्मीद कभी नहीं टूटती यह भी लिखो दिल के कोने में कहीं छुपी रहती है तुमसे में हंसी ख़ुशी की कविता की उम्मीद करती हूँ

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
September 15, 2015

हृदय स्पर्शी कविता और ऊपर लिखी कुछ पंक्तियाँ ,प्रिय सोनम ज़िंदगी में उतार चढाव आते रहते हैं पुरुषार्थ यही है संघर्षों का डट कर मुकावला किया जाय .अनेक शुभ कामनाएं .

    Sonam Saini के द्वारा
    September 15, 2015

    जी मैम ………सही कहा आपने ………. ज़िंदगी में उत्तर चढाव आते रहते हैं …..लेकिन जब मन कमजोर हो जाता है तो हौसले खत्म से हो जाते हैं ………….शुभकामनाओ के लिए बहुत बहुत धन्यवाद मैम …आजकल बहुत जरूरत है शुभकामनाओ की ….


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