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देवनिता मेरी पहली किताब .....

Posted On: 2 Dec, 2015 Others में

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सभी आदरणीय जनो को सादर नमस्कार …


वर्ष 2012 में जब मैंने जागरण जंक्शन पर अपना अकाउंट बनाया था तब मैं शौकिया तौर पर लिखती थी, यहां आने के बाद मुझे पता चला कि और भी बहुत लोग है जो लिखते हैं, कुछ बहुत अच्छा लिखते हैं, कुछ अच्छा लिखते हैं और कुछ मेरे जैसा लिखते हैं, जब मैंने  जागरण जंक्शन पर ब्लॉगिंग शुरू की थी तब मुझे ठीक से पता भी नही था कि यहां लिखा कैसे जाता है, हिंदी में कैसे लिखते हैं, दुसरो की पोस्ट पर प्रतिक्रिया कैसे दी जाती है !


धीरे-धीरे मैंने हिंदी में पोस्ट लिखना सीखा, फिर अपनी पोस्ट पर आये हुए कमेंट व दुसरो की पोस्ट पर कैसे कमेंट किये जाते हैं यह सीखा और फिर शुरू हुआ बाकि ब्लोगेर्स को जानने का सिलसिला !


अगर मैं ये कहूँ कि इस मंच ने ही मेरे शब्दों को परिपक्वता दी है तो ये अतिशयोक्ति नही होगी, मैंने  बहुत कुछ सीखा है यहाँ से, मुझे पहले लेख लिखना नही आता था यहाँ आकर, बाकि ब्लोग्गेर्स के लेख पढ़ पढ़ कर मैंने लेख लिखना सीखा है, जागरण जंक्शन ने मुझे बहुत कुछ दिया है जो मेरे लिए अनमोल है, जिसके लिए मैं जे जे की बहुत आभारी हूँ और जे जे को दिल से धन्यवाद करती हूँ !


आज जब मेरी पहली किताब देवनिता प्रकाशित होकर आ गयी है तब मैं उन सभी लोगो को दिल से धन्यवाद कहना चाहती हूँ जिनके मार्गदर्शन से, जिनके ब्लोग्स पढ़कर, जिनके आशीर्वाद से मैं यहाँ तक पहुँच पायी हूँ, श्रीमती सरिता सिन्हा मैम, प्रवीण मैम, श्री जवाहरलाल सिंह सर, आदरणीय प्रदीप कुशवाहा सर जी, सद्गुरु जी, रंजना मैम, यमुना मैम, योगेन्द्र सरस्वत सर, निर्मला सिंह गौर मैम, सुमित नैथानी, आशीष दुबे, टिम्सी मेहता, सुधा जायसवाल मैम, वो सब भी जिनके नाम मैं यहाँ लिख नही पाई हूँ, आप सभी के लेख/कवितायेँ मुझे बहुत पसंद हैं, मेरे साधारण से नाम को लेखन की दुनिया में एक पहचान देने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद ….. और मिसेज सिन्हा मुझे नकारात्मक जीवन से निकाल कर सकारात्मक जीवन में लाने के लिए आपका अनेकोअनेक बार धन्यवाद, मैं बहुत आभारी हूँ आपकी …….,


देवनिता मेरी पहली किताब, मेरा बहुत बड़ा सपना अब हकीकत बन चुका है, जिसने मुझे ब्लॉगर से ऑथर बनाया है, मुझे एक नयी पहचान दी है ….

http://www.amazon.in/Devnita-Sonam-Saini/dp/9352540743/ref=sr_1_1?ie=UTF8&qid=1448991535&sr=8-1&keywords=devnita

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Sonam Saini ….

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
December 9, 2015

प्रिय सोनम बहुत सारा प्यार और आशीर्वाद तुम्हारे प्रयास को साकार देख कर हम सभी गौरवान्वित हैं तुम बहुत अलहदा लिखती हो जो मैं इस अनुपम मंच और तुम्हारे फेस बुक पर भी पढ़ती रहती हूँ….इस लोकप्रिय मंच के प्रति बहुत बहुत आभार …जिसने एक सुदृढ़ परिवार बनाया .हमेशा आगे बढ़ती रहो …इस सुन्दर पुस्तक को अवश्य पढूंगी साभार

    Sonam Saini के द्वारा
    December 10, 2015

    आदरणीय मैम सादर नमस्कार ……, हांजी सही कहा आपने इस लोकप्रिय मंच को बहुत बहुत आभार, जिसने एक सुदृढ़ परिवार बनाया …, मैंने जो भी सीखा है जागरण जंक्शन परिवार के ब्लोग्गेर्स से ही सीखा है, इस निस्वार्थ प्यार और आशीर्वाद के लिए तहे दिल से धन्यवाद मैम ….. आभार ….इस पुस्तक को पढ़कर अपने विचार जरूर दीजियेगा ….., :)

Shobha के द्वारा
December 6, 2015

प्रिय सोनम अपने विचारों को बड़ी ही खूबसूरती से शब्दों का रूप देना तुम्हारी विशेषता है यह पुस्तक पहली जरूर होगी परन्तु अनगिनत किताबें लिखोगी यह मेरी शुभकामना है |अपनी पुस्तक दिल्ली की साहित्यिक लायब्रेरी में अवश्य भेजना ख्याति मिलेगी

    Sonam Saini के द्वारा
    December 7, 2015

    आदरणीय मैम सादर नमस्कार ……, शुभकामनाओ और आशीर्वाद के लिए आभारी हूँ मैम ….मार्गदर्शन हेतु धन्यवाद …. मैम वहां कैसे पुस्तक भेजी जाती है मुझे जानकारी नही है …., अभी ये शुरुआत ही है बस सीख रही हूँ … धन्यवाद मैम …..

    Shobha के द्वारा
    December 12, 2015

    प्रिय सोनम अपने पब्लिशर से कहो एक कापी भेज दें साहित्यिक लायब्रेरी मंडी हाउस में यह लायब्रेरी हैं यह उनकी जिम्मेदारी है वः कोंई भी पुस्तक उनके पास भेजी जाये उसको पाठकों के लिए बोर्ड पर लगायें में काफी पहले मैं वहाँ की मेंबर थी नयी जो भी पुस्तक आती थी वह बोर्ड पर उसका कवर पेज लगाते थे

Jitendra Mathur के द्वारा
December 5, 2015

सोनम, बीच में आपके अस्वस्थ होने के समाचार से मन उद्विग्न था । कई बार सोचा कि आपसे पूछा जाए कि अब आप स्वस्थ हुई हैं या नहीं लेकिन संकोच ने इस बाबत संपर्क करने से रोक दिया । अब आप इतने दिनों बाद आई हैं तो इतने अच्छे और हर्षदायक समाचार के साथ कि जिसे पाकर मन फूला नहीं समा रहा । बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं आपको । निस्संदेह देवनिता एक बहुत ही उत्कृष्ट पुस्तक होगी जो चहुं ओर सराही जाएगी । अत्यंत उज्ज्वल भविष्य है आपका । आपके सभी शुभचिंतकों और प्रशंसकों की शुभेच्छाएं और आशीष आपके साथ हैं ।

    Sonam Saini के द्वारा
    December 5, 2015

    आदरणीय जितेंदर माथुर जी सादर नमस्कार …. सबसे पहले तो इतने दिनों से कोई समाचार न देने के लिए तहे दिल से माफ़ी चाहती हूँ …. स्वस्थ अभी भी कुछ ठीक नही है बस ज़िंदगी है चल रही है तो चलना पड़ता है …. आपकी शुभकामनाओ के लिए तहे दिल से शुक्रिया व आभार …. देवनिता के बारे में तो आप इसे पढ़ कर ही इसके बारे में बता सकते हैं …. :) आप पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया देंगे तो मुझे बेहद ख़ुशी होगी …… शुभकामनाओ व आशीर्वाद के लिए बहुत बहुत धन्यवाद व आभार सर……..

jlsingh के द्वारा
December 3, 2015

आज ही मैंने एक प्रति के लिए आर्डर दे दी है. एक सप्ताह में पुस्तक मुझ तक पहुँच जाएगी, तब पढ़कर पुन: प्रतिक्रिया दूंगा.

    Sonam Saini के द्वारा
    December 4, 2015

    जी चाचा जी, आपकी  प्रतिक्रिया  का इंतजार  है मुझे …आशीर्वाद बनाये रखे ….

sadguruji के द्वारा
December 3, 2015

आदरणीया सोनम सैनी जी ! सादर अभिनन्दन ! आपका पहला उपन्यास ‘देवनिता’ प्रकाशित होने पर बहुत बहुत बाशीर्वाद और बधाई ! बहुत ख़ुशी हुई ! अब आपने जो राह चुनी है, बस उसी पर चलते रहिये ! आदरणीया सरिता सिन्हा जी ने और आदरणीय जवाहरलाल सिंह जी ने हमेशा ही आपका समुचित मार्गदर्शन किया है ! इस मंच के सभी ब्लॉगर मित्र आपके साथ हैं ! उपन्यास के बारे में थोड़ी जानकारी दीजिये तो अच्छा होगा ! अंत में पुनः बहुत बहुत हार्दिक बधाई !

    Sonam Saini के द्वारा
    December 3, 2015

    आदरणीय सदगुरु जी सादर नमस्कार ….. जी आदरणीय सरिता सिन्हा मैम और आदरणीय चाचा जी ने तो हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन किया ही है लेकिन आपके मार्गदर्शन और आशीर्वाद को भी मैं कैसे भूल सकती हूँ …..अपने अगले ब्लॉग में उपन्यास के बारे में लिखूंगी लेकिन उससे पहले आप नीचे दिए लिंक पर जाकर उपन्यास के बारे में पढ़ सकते हैं ….. आशीर्वाद, शुभकामनाओ व मार्गदर्शन हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद व आभार सर …..

jlsingh के द्वारा
December 2, 2015

प्रिय सोनम, बहुत बहुत आशीर्वाद और ढेर सारा प्यार! मैंने पहले भी कहा है और लिखा है,कि जब तुम लिखने बैठती हो, साक्षात माँ शारदे तुम्हारी लेखनी पर विराजमान हो जाती हैं. आदरणीया सरिता बहन, परवीन मैडम और जिन लोगों का नाम तुमने लिखा है, सबने तुम्हारी मिहनत को तराशा है, पर मूर्ति जो तुम्हारे मन के अंदर विराजमान थी, वह तुम्हारे प्रयास से ही प्रकट हो गयी. अब समय है उस मूर्ति पर पुष्प अर्पित करने का… हम सब तुम्हारे उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं और माँ शारदे से प्रार्थना करते हैं कि वे आगे भी तुम्हे सम्बल प्रदान करती रहें. अपनी भावुकता, निर्मलता, सरलता और अनुभव को शब्द देती रहो. वही शब्द मूर्त रूप धारण कर तुम्हारे सामने/हम सबके सामने प्रकट हो जायेंगे… आगे भी अनेक देव और देवियाँ, देवांश और वनिताएं प्रकट होती रहेंगी. अनंत शुभकामनाओं के साथ – तुम्हारा चाचा,

    Sonam Saini के द्वारा
    December 3, 2015

    चाचा जी नमस्कार ….शुभकामनाओ आशीर्वाद और स्नेह के लिए तहे दिल से धन्यवाद चाचा जी … सब आप सभी के आशीर्वाद का ही फल है ….वरना जब मैं यहां आई थी तब मुझे क्या आता था …. सिर्फ कुछ शब्दों को शब्दों से जोड़ना … :) धन्यवाद चाचा जी ….


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